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किसने कहा, कश्मीर में लड़कियां खेल नहीं सकती?
मनीष राठी/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Fri, 22 Nov 2013 02:24 PM IST
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परिवार, समाज का सहयोग मिला है। सरकार भी दिल खोलकर साथ दे रही है। कश्मीर में लड़कियां घूम व खेल सकती हैं। लड़कियों पर पाबंदी होती तो वे आज खेलने उत्तराखंड नहीं पहुंच पाती।
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अब कुछ करके दिखाने का वक्त है बस जीत के जाना है। यह कहना है जम्मू कश्मीर से टेनिस बाल क्रिकेट की नेशनल चैंपियनशिप में प्रतिभाग करने धर्मनगरी आई छात्राओं का।
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समय के साथ-साथ हालात सुधरे
जम्मू कश्मीर का नाम जुबां पर आते ही आतंक और कट्टरवाद की यादें जेहन में उतर आती हैं। लेकिन समय के साथ-साथ वहां हालात सुधर रहे हैं।
पर्दे और घरों में कैद रहने वाली लड़कियां अब देश-विदेश में कश्मीर और देश के लिए प्रतिभाग कर रही हैं।
15 लड़कियों का दल
हरिद्वार में आयोजित टेनिस बाल क्रिकेट की 21वीं जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में जम्मू-कश्मीर के तीन जिलों श्रीनगर, बडगांव, अनंतनाग से 15 लड़कियों का एक दल प्रतिभाग करने आया हुआ है।
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कश्मीर में लड़कियों के घूमने, खेलने आदि की पाबंदी वाले सवाल के जवाब में टीम की कप्तान नोवा नजीर ने किसी तरह के प्रतिबंध से इनकार किया। कहा, हम जब चाहें जहां चाहें जा सकते हैं।
परिवार के साथ-साथ प्रदेश सरकार भी पूरा सहयोग करती है। उन्होंने कहा कि अगर हमें वहां पर किसी तरह की समस्या होती, या हम पर किसी तरह का प्रतिबंध होता तो यहां अपने प्रदेश का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे होते।
क्रिकेट के प्रति रुझान बढ़ा
टीम की अन्य सदस्य जीया अमीर, हुमाया, मुदस्सर, शबिरा, अनलित, नसिबा, अनिशा, गोसिया, फरहदा आदि खिलाड़ियों का कहना है कि आमतौर पर कश्मीर में फुटबाल ज्यादा खेला जाता है। लेकिन जब से कश्मीर के परवेज रसुल ने राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व किया है, वहां क्रिकेट के प्रति रुझान बढ़ रहा है।
हम उन सबके शुक्रगुजार हैं जिन्होंने हमें सहयोग किया है। टीम की मैनेजर और कोच महमुदा ने कहा कि लड़कियां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने पर बेहद खुश हैं।