कार्तिक पूर्णिमा पर ऐसे करें पूजन, कई जन्मों तक मिलेगा फल
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आज (बुधवार) कार्तिक पूर्णिमा है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर कृत्तिका नक्षत्र का संयोग बन रहा है, जो कि बेहद शुभ माना जाता है। इधर मंगलवार को बैकुंठ चतुर्दशी व्रत किया गया। इस मौके पर भगवान विष्णु और शिवजी का विशेष पूजन हुआ। मंदिरों में सुबह और शाम पूजन के साथ ही विशेष आरती की गई।
कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। इसी दिन भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का अंत किया था। राक्षस के अंत के बाद महादेव की पूजा त्रिपुरारी के रूप में होने लगी।
मान्यता है कि इस दिन कृतिका नक्षत्र में भगवान भोलेनाथ के दर्शन मात्र से व्यक्ति सात जन्मों तक धनी और ज्ञानी होता है।
कृत्तिका नक्षत्र का अद्भुत संयोग, स्नान का विशेष महत्व
इस दिन चंद्रमा जब आकाश में उदित हो रहा हो ठीक उसी समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन कृतिकाओं का पूजन करने से भोले भंडारी प्रसन्न होते हैं।
इस दिन गंगा में स्नान करने से पूरे वर्ष स्नान के बराबर फल मिलता है। डॉ. आचार्य सुशांत राज के अनुसार बुधवार को कार्तिक पूर्णिमा के दिन कृत्तिका नक्षत्र होना बेहद शुभ माना जा रहा है।
इस दिन देव-ऋषि, पितृ तर्पण, पंचगव्य पान, ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए भूमि शयन एवं अखंड दीप जलाने से वर्षभर के पापों का नाश होता है।