चकराता। क्षेत्र के मोहना गांव में करीब 37 साल बाद कार्तिक मास की दिवाली मनाई गई। यहां कार्तिक दिवाली के एक माह बाद दिवाली मनाई जाती है, लेकिन 37 साल बाद ऐसा मौका आया जब मोहना गांव ने भी पूरे देश के साथ दिवाली का जश्न मनाया। भीमल की मशाल के साथ लोग जमकर नाचे।
जौनसार बावर में देश के अन्य स्थानों पर दीवाली मनाए जाने के एक माह बाद दीवाली मनाने का रिवाज है। दरअसल यहां क्षेत्र के आराध्य माने जाने वाले चालदा महाराज के विराजमान होने पर दिवाली मनाई जाती है और 37 साल बाद ऐसा अवसर आया जब चालदा महाराज कार्तिक मास की दिवाली के दौरान पहुंचे। लोगों ने चालदा महाराज के दर्शन कर सुख और समृद्धि की आशीर्वाद मांगा। शाम ढलते ही पूरा गांव होल्ले की रोशनी से रोशन हो उठा। बड़ी संख्या में लोगों ने भीमल की मशाल के साथ मंदिर परिसर में नृत्य किया। दिवाली के इस जश्न में मोहना, द्वार, तपलाड, उपरली अठगांव, बनगांव, बौंदूर और विशलाड़ खतों के 100 से अधिक गांव के लोगों ने प्रतिभाग किया। लोगों ने हाथों में भीमल की लकड़ी की मशाल लेकर देवता की पूजा अर्चना की। इसके अलावा दिवाली पर मटियावा गांव में स्वच्छता अभियान चलाया गया। लोगों ने ग्राम प्रधान मिजान दास और संजीव चौहान के नेतृत्व में स्वच्छता की शपथ ली। इस मौके पर अतर सिंह, मोहर सिंह, सरदार सिंह, सुरेंद्र सिंह, गुमान दास, भजन दास, नरेंद्र दास, खजान सिंह आदि मौजूद रहे।