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कारगिल शहीद के लिए मां ने बनवाया मंदिर

Sat, 26 Jul 2014 09:56 AM IST
दीप जोशी/अमर उजाला, अल्मोड़ा
दीप जोशी/अमर उजाला, अल्मोड़ा Updated Sat, 26 Jul 2014 09:56 AM IST
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kargil war anniversary 2014

यह एक साहसी मां की वीर पुत्र के प्रति अगाध प्रेम की अनूठी कहानी है।

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आम तौर पर बच्चों द्वारा माता-पिता की स्मृति में मंदिर बनाने के उदाहरण मिलते हैं, लेकिन इकलौते बेटे के कारगिल में शहीद होने के बाद मां ने सरकारी सहायता के रूप में मिले पैसों से मंदिर बनाकर वहां बेटे की मूर्ति लगाई।

गांव में शहीद मोहन सिंह की स्मृति में सड़क भी बन चुकी है। गांव के लोग खास अवसरों पर मंदिर जाकर शहीद मोहन सिंह बिष्ट को याद करते हैं।

अल्मोड़ा तहसील के खड़ाऊं गांव निवासी मोहन सिंह बिष्ट चार जुलाई 1999 को कारगिल में शहीद हुए थे।

गांव में मंदिर बनाकर बेटे की मूर्ति लगाई

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उस समस उनके पिता भीम सिंह का निधन हो चुका था। तब उनकी बहन सुंदरी का विवाह हो चुका था। मोहन सिंह अपने परिवार का अकेला सहारा थे।

मोहन सिंह के शहीद होने के बाद मां देबुली देवी को गहरा आघात पहुंचा। प्रशासन ने सरकार और सेना द्वारा दी गई सहायता राशि में से दो लाख रुपए उनकी मां देबुली देवी के नाम से एफडी के तौर पर रख दिए थे।

यह मां का बेटे के प्रति अगाध प्रेम का प्रतीक है कि अनपढ़ मां देबुली देवी ने सरकार से मिले सारे पैसों से बेटे मोहन की स्मृति में गांव में मंदिर बनाकर बेटे की मूर्ति स्थापित कराई।

बेटे की स्मृति में बनाए राधा-कृष्ण के इस मंदिर परिसर के बाहर शहीद मोहन सिंह की मूर्ति लगाई गई है।

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दिल्ली में हैं शहीद की पत्नी और बच्चे

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शहीद मोहन सिंह की यह मूर्ति मुंबई से बनकर आई। मूर्ति बनवाने में शहीद मोहन सिंह के जीजा शमशेर सिंह मेहरा ने भी सहयोग किया। जो मुंबई में नौ सेना में काम करते हैं। मूर्ति के अनावरण के मौके पर पत्नी विमला देवी भी परिवार सहित दिल्ली से गांव आई थीं।

गांव के लोगों ने बताया कि मंदिर में लोग पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही कारगिल दिवस और अन्य अवसरों पर लोग शहीद मोहन सिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण करते हैं।

देबुली देवी का निधन छह साल पहले हो चुका है। शहीद की पत्नी और बच्चे दिल्ली में रहते हैं। हालांकि उनका गांव आना-जाना रहता है। 1999 में मोहन सिंह के शहीद होने के चार माह बाद उनका बेटा हुआ। जो इस समय दसवीं का छात्र है। दो बेटियां दिल्ली में पढ़ रही हैं। जबकि सबसे बड़ी बेटी का विवाह हो चुका है।
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