छह राज्यों में शुरू हो गई कांवड़ की तैयारी
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श्रावण मास की कांवड़ यात्रा एक ऐसी धार्मिक यात्रा है, जिसका संबंध केवल उत्तराखंड के हरिद्वार से ही नही, बल्कि छह राज्यों से है। सभी छह राज्यों में कांवड़ यात्रा की अलग-अलग तैयारियां होती हैं। सभी राज्यों की मशीनरी एक महीने से सक्रिय हो चुकी है और लगातार बैठकों के दौर चल रहे हैं। राजस्थान में तो मुख्यमंत्री स्तर से जयपुर में पहली बैठक ली जा चुकी है। यूपी में अनेक बैठकों के दौर हो चुका है।
हरकी पैड़ी से गंगा जल भरकर भगवान आशुतोष का अभिषेक करने के लिए सबसे पहले राजस्थान के कांवड़िए पहुंचते हैं। इन कांवड़ियों का आगमन आषाढ़ मास में ही शुरू हो जाता है। आषाढ़ पूर्णिमा गुरु पूर्णिमा के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है। नौ जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा पड़ने से पूर्व ही राजस्थान के कांवड़िए हरिद्वार पहुंच चुके होंगे।
ये कांवड़िए गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु पूजा कर अपनी कांवड़ उठा लेंगे। राजस्थान के कांवड़ियों की वापसी हरियाणा से पंजाब के भंठिडा होते हुए गंगानगर के रास्ते होती है। दूसरी बड़ी वापसी यूपी और दिल्ली को पार कर हरियाणा के गुड़गांव में प्रवेश करती है और फिर अलवर के रास्ते राजस्थान होती है। इस मार्ग पर भी पहले तीन दिनों में ही लाखों कांवड़िए वापस लौट चुके होते हैं, जबकि पंजाब, यूपी, हरियाणा और दिल्ली के कांवड़ियों का आगमन भी तब तक शुरू नहीं होता।
सुरक्षा के व्यापक इंतेजाम
जहां तक यूपी का सवाल है सहारनपुर जनपद को सर्वाधिक भार उठाना पड़ता है। इस जनपद से यूपी, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान चार राज्यों के कांवड़िए लौटते हैं। हरिद्वार में कांवड़ यात्रा की वापसी हरिद्वार-रुड़की मार्ग, हरिद्वार-मुरादाबाद मार्ग और लक्सर मार्ग के रास्ते होती है। इन सभी रास्तों पर उत्तराखंड शासन को भारी भरकम इंतजाम करते होते हैं।
यूपी को भी अपने लाखों कांवड़ियों के साथ-साथ दूसरे राज्यों के कांवड़ियों का बोझ उठाना पड़ता है। इसलिए पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में बहुत भारी इंतजाम किए जाते हैं। इस बार तो यूपी सरकार ने सहारनपुर और मुरादाबाद में कांवड़ यात्रा पर हेलीकॉप्टर द्वारा निगरानी का प्रबंध किया है। उत्तराखंड में भी ड्रोन से यातायात नियंत्रित किया जाएगा।
दिल्ली राज्य से करीब 10 लाख कांवड़िए गंगाजल लेने आते है। इसलि दिल्ली सरकार प्रवेश और निकासी मार्गों पर चाक चौबंद प्रबंध करती है। छह राज्यों की सरकारें कांवड़ यात्रा को संभालने जुटी हुई हैं।