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कैलास यात्रा को लेकर आशंकाओं पर लगा विराम
संजू पंत/ अमर उजाला, डीडीहाट (पिथौरागढ़)
Updated Wed, 26 Nov 2014 03:46 PM IST
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नाथुला दर्रे से कैलास मानसरोवर यात्रा शुरू करने के फैसले के बाद उत्तराखंड से अब तक संचालित हो रही यात्रा को लेकर उठी आशंकाओं पर विराम लग गया है।
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अगले साल 29 मई को शुरू होगी यात्रा
उत्तराखंड में कुमाऊं के काठगोदाम से वाया अल्मोड़ा, धारचूला, गुंजी, लिपुलेख होते हुए यात्रा पहले की तरह चलती रहेगी। हालांकि 2015 की यात्रा में यह व्यवस्था की गई है कि 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के यात्रियों को नाथुला दर्रे से कैलास मानसरोवर यात्रा पर भेजा जाएगा। लिपुलेख दर्रे से होने वाली यात्रा में युवा यात्री शामिल रहेंगे।
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दिल्ली में विदेश मंत्रालय की ओर से सोमवार को कैलास मानसरोवर यात्रा 2015 के संबंध में बुलाई पहली बैठक में शिरकत करने पहुंचे आईटीबीपी सातवीं वाहिनी के सेनानी केदार सिंह रावत ने फोन पर यात्रा को लेकर बैठक हुए फैसलों की जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में कैलास मानसरोवर यात्रा में भाग लेने वालों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन में दिए जाने वाले विवरण के आधार पर यात्रियों की कंप्यूटर खुद छंटनी कर देगा। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष की यात्रा 29 मई 2015 से शुरू होगी और 30 सितंबर 2015 को इसका समापन हो जाएगा।
अगले वर्ष भी कुल 18 यात्री दल जाएंगे। हर दल में यात्रियों की संख्या पिछली बार की तरह 50 के आसपास रहेगी। रावत ने बताया कि वर्ष 2015 में भी यात्रा का संचालन आईटीबीपी और कुमाऊं मंडल विकास निगम संयुक्त रूप से करेंगे। यात्रियों की सुरक्षा, मेडिकल परीक्षण की जिम्मेदारी आईटीबीपी के पास रहेगी।
प्रधानमंत्री के दौरे के समय मिली थी मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 सितंबर को चीन दौरे के समय नाथुला दर्रे से कैलास मानसरोवर यात्रा शुरू करने का प्रस्ताव रखा था। इसे चीन सरकार ने मंजूरी दे दी थी। इस फैसले के बाद पूरे राज्य में विरोध हुआ था।
नाथुला दर्रा सिक्किम के गंगटोक से 56 किलोमीटर दूरी पर है। नाथुला दर्रे से भी व्यापार 1962 में बंद हो गया था। इस बार कैलास यात्री इस रास्ते से भी कैलास दर्शन कर सकेंगे।