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एक कॉल से हैंग कर देते हैं अमरीका और कनाडा तक के कंप्यूटर
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फर्जी कॉल सेंटर में रेड के दौरान पकड़ा गया कैश। संवाद
- फोटो : DEHRADUN
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उत्तराखंड की राजधानी में बैठकर ये ठग एक कॉल से अमेरिका से लेकर कनाडा तक के कंप्यूटर को हैंग कर देते हैं। इसे एक वायरस का नाम दिया जाता है और फिर ठीक करने के लिए एंटी वायरस बेचा जाता है। अनुमान है कि ठगों ने दिसंबर 2021 से अब तक करीब 200 करोड़ रुपये की ठगी की है। एसटीएफ इनके खातों की जांच भी कर रही है।
दरअसल, यह कॉल वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) माध्यम से की जाती है। यह एक तरह से कॉलिंग का तरीका होता है। बिल्कुल वैसे ही, जैसे व्हाट्सएप आदि से कॉल की जाती है। इस कॉल को रिकॉर्ड नहीं किया जा सकता है। नंबर भी पहचान में नहीं आता है। इसी तरह की कॉल कर विदेश में बैठे लोगों के कंप्यूटर में एक वायरस भेजा जाता है। इससे उनके कंप्यूटर और लैपटॉप आदि हैंग हो जाते हैं। इसके बाद उन्हें टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर फिर से कॉल किया जाता है।
चूंकि, किसी से बहुत बड़ी रकम नहीं मांगी जाती है तो पीड़ित भी 100-200 डॉलर उनके खातों में जमा करा देते हैं। ये खाते भी उन्हीं देशों के होते हैं, जिन देशों के नागरिकों को निशाना बनाया जाता है। यह कॉल सेंटर भी यहां दिसंबर 2021 से संचालित हो रहा था। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि इन्होंने 200 करोड़ रुपये से भी अधिक की रकम विदेशियों से ठगी है।
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हवाला कनेक्शन की भी जांच
विदेशों में बैठे लोग अपने यहां के लोकल खातों में ही डॉलर जमा कराते हैं। वहीं पर स्कैनिंग के माध्यम से भी रुपया जमा होता है। इतनी बड़ी रकम किसी करेंसी एक्सचेंज सेंटर पर लगातार एक्सचेंज नहीं की जा सकती है। क्योंकि, सब ऑन रिकॉर्ड हो जाएगा। जबकि, इन लोगों का कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं होता है। ऐसे में अंदेशा जताया जा रहा है कि यह पैसा उनके पास हवाला के माध्यम से भेजा जाता है। इसके लिए एसटीएफ इनके हवाला कनेक्शन की भी जांच कर रही है।
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दरअसल, यह कॉल वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) माध्यम से की जाती है। यह एक तरह से कॉलिंग का तरीका होता है। बिल्कुल वैसे ही, जैसे व्हाट्सएप आदि से कॉल की जाती है। इस कॉल को रिकॉर्ड नहीं किया जा सकता है। नंबर भी पहचान में नहीं आता है। इसी तरह की कॉल कर विदेश में बैठे लोगों के कंप्यूटर में एक वायरस भेजा जाता है। इससे उनके कंप्यूटर और लैपटॉप आदि हैंग हो जाते हैं। इसके बाद उन्हें टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर फिर से कॉल किया जाता है।
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चूंकि, किसी से बहुत बड़ी रकम नहीं मांगी जाती है तो पीड़ित भी 100-200 डॉलर उनके खातों में जमा करा देते हैं। ये खाते भी उन्हीं देशों के होते हैं, जिन देशों के नागरिकों को निशाना बनाया जाता है। यह कॉल सेंटर भी यहां दिसंबर 2021 से संचालित हो रहा था। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि इन्होंने 200 करोड़ रुपये से भी अधिक की रकम विदेशियों से ठगी है।
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हवाला कनेक्शन की भी जांच
विदेशों में बैठे लोग अपने यहां के लोकल खातों में ही डॉलर जमा कराते हैं। वहीं पर स्कैनिंग के माध्यम से भी रुपया जमा होता है। इतनी बड़ी रकम किसी करेंसी एक्सचेंज सेंटर पर लगातार एक्सचेंज नहीं की जा सकती है। क्योंकि, सब ऑन रिकॉर्ड हो जाएगा। जबकि, इन लोगों का कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं होता है। ऐसे में अंदेशा जताया जा रहा है कि यह पैसा उनके पास हवाला के माध्यम से भेजा जाता है। इसके लिए एसटीएफ इनके हवाला कनेक्शन की भी जांच कर रही है।