बस्तड़ी के वो खौफनाक पांच घंटे, हर पल सामने नजर आ रही थी मौत
- बस्तड़ी आपदा को कवर करने गए पत्रकारों की आपबीती
- जंगल में भकटते रहे मीडिया कर्मी
- जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष किशन सिंह भंडारी बने मददगार
विस्तार
शुक्रवार एक जुलाई का दिन आफत से भरा था। हर तरफ तबाही का मंजर, मोटर मार्ग भी जगह-जगह तबाह। बस्तड़ी हादसे को कवर करने गए मीडिया कर्मियों ने भी इस रास्ते पर भारी मुसीबतें झेलीं। कवरेज कर लौट रहे पत्रकार पांच घंटे तक हचीला (चरमा और बंदरलीमा के मध्य) के जंगल में भटकते रहे।
खड़ी चट्टान में घास-फूस पकड़कर पल-पल मौत का सामना कर रास्ता ढूंढते रहे। ऐसे में न तो आपदा प्रबंधन और न ही सरकारी तंत्र का कोई सहारा मिल मिल पाया। जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष किशन भंडारी पत्रकारों के लिए मददगार बने, जिस कारण पत्रकार सकुशल लौट सके।
शुक्रवार सुबह बस्तड़ी हादसे की कवरेज के निकले मीडिया कर्मियों की राह कनालीछीना से आगे गुड़ौली, बंदरलीमा में मलबे से पटी सड़क ने रोक ली। कई घंटे इस स्थान पर फंसे रहने के बाद मीडिया कर्मी बंदरलीमा से चरमागाड़ होते हुए 12 किमी का कठिन ढलान, खड़ी चढ़ाई पार कर बस्तड़ी पहुंचे।
खराब सड़क के चलते पहाड़ी के रास्ते से चले, भटक गए
बस्तड़ी से वापसी के बाद सिंघाली पहुंचे तो वाहन नहीं थे। डीडीहाट के समाजसेवक राजू चुफाल ने अपने दो वाहनों से मीडिया कर्मियों को चर्मा तक पहुंचाया। जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर चर्मा के बाद राह बेहद कठिन थी। खिरचना, बंदरलीमा में एनएच जबरदस्त तरीके से मलबे से पटा था।
बस्तड़ी से लौट रहे 8 असम राइफल्स के जवान सड़क के स्थान पर पहाड़ी से लौट रहे थे। कारण आगे सड़क दलदल में तब्दील हो चुकी थी। खड़ी पहाड़ी पर चढ़ कर बंदरलीमा में सड़क पर उतरना था। साथ में चल रहे बंदरलीमा के दो युवक गिरीश भट्ट और मोहित भट्ट को पहाड़ी के रास्ते की जानकारी थी।
उक्त संवाददाता के साथ ही पत्रकार विजय वर्धन उप्रेती, कोमल मेहता, यशवंत महर, गिरीश पंत गणपति, राकेश पंत, मयंक जोशी, दीपक गुप्ता, दीपक जोशी, जिला सूचनाधिकारी गिरिजा शंकर जोशी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत, जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार शाम करीब 7 बजे पहाड़ी के रास्ते चल दिए। घुप अंधेरे में दो-तीन टॉर्च और मोबाइल फोन की मदद से खड़ी चट्टान में आगे बढ़े। खड़ी चट्टान में कहीं भी रास्ता नहीं था।
घास पकड़कर आगे बढ़े, नीचे हजार मीटर गहरी खाई
घास पकड़कर खिसक-खिसक कर आगे बढ़ने लगे। नीचे 1000-1500 मीटर गहरी खाई थी। सभी रास्ता भटक चुके थे। स्थानीय दो युवकों में से एक रास्ता इधर को बताता तो दूसरा उधर को। तीन घंटे हर पल मौत के साये में बीते। संचार नेटवर्क गायब था, फोन की बैटरियां एक कर डाउन होने लगी थी।
रात 10 बजे कनालीछीना निवासी जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष भाजपा नेता किशन सिंह भंडारी से संपर्क हुआ। भंडारी ने खिरचना से कमल खोलिया और सुंदर सिंह खोलिया को जंगल भेजा। रात 11 बजे यह लोग आवाज और रोशनी के सहारे पत्रकारों को खोजने में कामयाब रहे। रात 12 बजे मुख्य सड़क में आए।
वहां से भंडारी अपने वाहन में बंदरलीमा जहां पर मीडिया कर्मियों के वाहन खड़े थे, वहां तक लाए। कनालीछीना में मीडिया कर्मियों को भोजन कराया। रात 2 बजे जिला मुख्यालय पहुंचे।
Published By: Vivek Singh