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Joshimath: पहली बार तकनीकी जांच से खुलेगा भू-धंसाव का राज, जमीन की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करेंगे वैज्ञानिक

Tue, 10 Jan 2023 07:22 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 10 Jan 2023 07:22 PM IST
सार

आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ यह पता लगाएंगे कि जोशीमठ की धारण क्षमता कितनी है। राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की की टीम क्षेत्र में ड्रेनेज की मैपिंग, पानी के नमूनों की जांच और स्रोत का पता लगाएगी।

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Joshimath Sinking: technical investigation will open the secret of landslide For the first time
जोशीमठ में दरक रहा पहाड़ - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

जोशीमठ में भू धंसाव के बारे में कई रिपोर्ट आ चुकी हैं, लेकिन आज तक इसकी कोई तकनीकी जांच नहीं हुई। सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा के मुताबिक, पहली बार इसकी तकनीकी जांच होने जा रही है। यानी जोशीमठ क्यों धंस रहा है, इसके कारणों का पता अब भूगर्भ विज्ञानी अपनी जांच में लगाएंगे।

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डॉ. सिन्हा ने कहा कि अभी तक जोशीमठ भूस्खलन के बारे में जितने भी रिपोर्ट आई हैं, वे बाहर की परिस्थितियों के आधार पर आई हैं। लेकिन इसका वैज्ञानिक और तकनीकी कारण क्या है, इस बारे में पहली बार जांच होने जा रही है। इस कार्य के लिए जियो टेक्निकल और जियो फिजिकल सर्वे कराया रहा है। आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ यह पता लगाएंगे कि जोशीमठ की धारण क्षमता कितनी है। राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की की टीम क्षेत्र में ड्रेनेज की मैपिंग, पानी के नमूनों की जांच और स्रोत का पता लगाएगी। राष्ट्रीय भू भौतिकी अनुसंधान संस्थान जियो फिजिकल सर्वे की जांच करेगी। साथ ही जोशीमठ में हो रहे मिट्टी कटाव और टो कटिंग भी जांच होगी।
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15-30 दिन में मांगी गई है जांच रिपोर्ट
केंद्रीय एजेंसियों ने सरकार ने भूगर्भीय और भू भौतिकी की तकनीकी जांच 15 से 30 दिन पूरा करने का अनुरोध किया है।

जोशीमठ में ड्रेनेज सिस्टम का टेंडर जल्द
जोशीमठ में सरकार जल निकासी (ड्रेनेज) सिस्टम बनाएगी। सचिव आपदा प्रबंधन के मुताबिक, अगस्त महीने में जोशीमठ में जांच करके लौटी विशेषज्ञ टीम की सिफारिश पर जांच सिंचाई विभाग कार्यदायी एजेंसी के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। ये निविदा 20 जनवरी को खुलनी थी। लेकिन अब यह 13 जनवरी को खुलेगा। ये कार्य सिंचाई अनुसंधान संस्थान(आईआरआई) कराएगा।

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विस्थापितों के लिए सुरक्षित जमीन की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करेंगे वैज्ञानिक
जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) के वैज्ञानिक जोशीमठ में भू-धंसाव की जद में आए लोगों के लिए सुरक्षित जमीन की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करेंगे। केंद्र सरकार के निर्देश पर संस्थान ने पांच वैज्ञानिकों की टीम गठित कर दी है, जो मंगलवार को जोशीमठ रवाना होगी।

जीएसआई के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉक्टर प्रसून जाना ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से गठित विशेषज्ञों की टीम में संस्थान के वैज्ञानिक पहले से ही सहयोग कर रहे हैं। लेकिन, अब विस्थापन के लिए सुरक्षित जमीन की तलाश के लिए भी जीएसआई के पांच वैज्ञानिकों की टीम बनाई गई है।

टीम सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई जमीनों का वैज्ञानिक पहलुओं से अध्ययन कर फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करेगी। टीम यह बताएगी कि जिस जमीन पर विस्थापितों को नए सिरे से बसाया जाना है, वह प्राकृतिक आपदा के लिहाज से कितना सुरक्षित है। बताया कि वह केंद्र सरकार, पीएमओ और राज्य सरकार के लगातार संपर्क में हैं। इस आपदा से निपटने के लिए राज्य सरकार को जो भी तकनीकी मदद चाहिए, वह मुहैया कराई जाएगी। इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।

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