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रोडवेज में होगी चालकों की भर्ती, पढ़ें पूरी खबर
मनमीत रावत /अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 13 Mar 2015 01:52 PM IST
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उत्तराखंड में पहली बार उत्तराखंड परिवहन निगम 700 नियमित चालकों की भर्ती करने जा रहा है।
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इनमें से 400 पदों पर सीधी भर्ती होगी, जबकि करीब 200 उपनल के जरिये और 100 चालक पीआरडी के जरिये आएंगे। भर्ती प्रक्रिया मई के पहले सप्ताह में हो सकती है। आवेदन करने वाले को उत्तराखंड का मूल निवासी होना जरूरी है।
राज्य गठन के बाद अभी तक रोडवेज में चालकों की भर्ती नहीं हो सकी है। ज्यादातर चालक या तो उत्तर प्रदेश के समय के हैं या फिर आउट सोर्स के जरिये आए हैं। 2008 में निगम ने चालकों की सीधी भर्ती करने का प्रयास किया था, लेकिन विवाद होने के कारण प्रक्रिया रोक दी गई थी।
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तब से रोडवेज बसों में चालकों की भारी कमी थी। निगम के प्रबंध निदेशक बृजेश संत ने चालकों की भर्ती का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा, जिसे मंजूरी मिल गई है। प्रबंध निदेशक के अनुसार कुछ ही दिनों में विज्ञप्ति जारी कर दी जाएगी।
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यह होगी योग्यता
शैक्षिक योग्यता- आठवीं पास
लंबाई - मैदान में रहने वालों के लिए 5 फीट 3 इंच
पहाड़ में रहने वालों के लिए 5 फीट 2 इंच
अनुभव : तीन साल वाणिज्यिक वाहन चलाने का अनुभव, पब्लिक आटो व्हीकल लाइसेंस, पहाड़ के लिए आवेदन करने वालों के लिए हिल लाइसेंस
रोडवेज से 700 बसें होंगी रिटायर
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बढ़ती दुर्घटनाओं को रोकने और आरामदायक सफर के लिए उत्तराखंड परिवहन निगम को तीन साल पुरानी बसों को रिटायर करने का आदेश दिया है। निगम की कुल 1035 में से 700 बसें इसकी जद में आ रही हैं।
निगम ने इन बसों की नीलामी की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं दस करोड़ की लागत से 65 बसों की नई खेप भी जल्द रोडवेज को मिलने वाली है। मुख्यमंत्री हरीश रावत खुद परिवहन मंत्रालय देख रहे हैं। उनका फोकस रोडवेज की हालत सुधारने पर है।
यही कारण है कि उन्होंने रोडवेज के 400 करोड़ के घाटे में से 122 करोड़ रुपये माफ कर दिए। वहीं उन्होंने 700 बसों को तत्काल रिटायर करने का भी आदेश दिया है। प्रबंध निदेशक उत्तराखंड परिवहन निगम बृजेश संत ने बताया निगम को कुछ और कर्ज माफ हो जाए तो नई बसें खरीदने लिए ऋण मिलने में आसानी होगी।
नई बसों के आने से सबसे ज्यादा फायदा पहाड़ी रूटों पर होगा। बताया कि 700 बसों में से जो बसें अच्छी हालत में हैं उन्हें पहाड़ी रूटों से हटाकर मैदानी रूटों पर चलाया जाएगा। इस स्थिति में निगम को 590 नई बसों की जरूरत होगी, जिसका प्रस्ताव जल्द ही शासन को भेजा जाएगा।