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न एग्जाम न इंटरव्यू, इस विभाग में अर्जी पर मिलीं नौकरियां

Sat, 23 Sep 2017 01:51 PM IST
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 23 Sep 2017 01:51 PM IST
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job forgery in uttarakhand assembly
uttarakhand assembly house

उत्तराखंड में कांग्रेस कार्यकाल में विवादित नियुक्तियों के इस प्रकरण में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल पर आरोप है, कि उनकी सरपरस्ती में न एग्जाम हुए न इंटरव्यू और चहेतों को अर्जी पर नौकरी बांट दी गई।

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एक झटके में किसी को समीक्षा अधिकारी तो किसी को अपर निजी सचिव बना दिया गया। स्पीकर ने तदर्थ नियुक्ति देने के लिए ऐसे उम्मीदवारों के आवेदन पर आदेश कर दिए, जिन्हें नौकरी की अर्जी तक लिखनी नहीं आती थी।
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याची के वकील की ओर से इन तथ्यों के आईने में कोर्ट में अनुरोध किया गया है कि विधानसभा नियमावली का अनुपालन किए बिना विधानसभा में की गई इन नियुक्तियों को निरस्त किया जाए।

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सरकारी नौकरी पाना किसी सपने से कम नहीं

job forgery in uttarakhand assembly
गोविंद सिंह कुंजवाल - फोटो : अमरउजाला

प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या लाखों में है। इनमें हजारों बेरोजगार हर दिन रोजगार के लिए एड़ियां रगड़ रहे हैं। जो समर्थ हैं, वे कोचिंग केंद्रों में नौकरी के लिए इम्तहान की तैयारी कर रहे। दिन-रात मेहनत करने के बाद भी उनके लिए सरकारी नौकरी पाना किसी सपने से कम नहीं।

मगर इनसे इतर 158 ऐसे भाग्यशाली उम्मीदवार भी थे, जिन्होंने पूर्व सरकार में उत्तराखंड विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष को नौकरी के लिए एक प्रार्थना पत्र लिखा और उनकी किस्मत चमक गई। न कोई इम्तिहान हुआ। न साक्षात्कार का सामना करना पड़ा। रक्षक सरीखे पद के लिए भी कोई दंड बैठक नहीं लगानी पड़ी। आरटीआई में प्राप्त सूचना से यह हैरान करने वाला तथ्य उजागर होने के बाद मामला कोर्ट पहुंच गया।

विधानसभा में ऐसे-ऐसे को भी सहायक समीक्षा अधिकारी व सहायक निजी सचिव सरीखे पदों पर तदर्थ नियुक्ति दे दी गई थी, जिन्हें प्रार्थना पत्र लिखना नहीं आता। आधे से ज्यादा प्रार्थना पत्रों पर उम्मीदवारों ने अपना पता ठिकाना तक लिखने की जहमत नहीं उठाई थी। प्रार्थना पत्रों में से एक पर भी तारीख दर्ज नहीं है। अधिकांश प्रार्थना पत्रों पर तो उम्मीदवारों ने अपने पिता या अभिभावक का नाम लिखने तक की जरूरत महसूस नहीं की। न ही नियुक्ति देने की सिफारिश करने वाले तत्कालीन स्पीकर ने, जिन्होंने हर प्रार्थना पत्र पर एक ही अंदाज में लिखा,‘अपर निजी सचिव पद पर तदर्थ नियुक्ति करें।’

प्रार्थना पत्रों की बानगी

job forgery in uttarakhand assembly
jobs
- पंकज सिंह नाम के एक अभ्यर्थी ने विधानसभा अध्यक्ष को जो प्रार्थना पत्र लिखा है, उसमें उन्होंने ‘आदरणीय’ को आद्रणीय, ‘मैं’ को ‘मे’, ‘अभ्यर्थी’ को ‘अभियर्ती’, विस्तृत को वीस्तृत और ‘नियुक्ति’ को ‘नुयुक्ति’ ‘ताकि’, ‘ताकी’ लिखा है। तत्कालीन अध्यक्ष ने इस प्रार्थना पत्र पर लिखा, ‘सचिव, अपर निजी सचिव के पद पर तदर्थ नियुक्ति करें।’

- दया नगरकोटी ने प्रार्थना पत्र में लिखा कि मैं विधानसभा में कार्य करने की योगिता (योग्यता)  रखती हूं। लेकिन ये शैक्षिक योग्यता क्या है, इसका उल्लेख नहीं किया। न ही ये इच्छा जताई कि वह किस पद के योग्य हैं और क्या पद चाहतीं हैं। उन्होंने कोई भी नौकरी मांगी और तत्कालीन स्पीकर ने उनके प्रार्थनापत्र पर लिखा सचिव, ‘अपर निजी सचिव के पद पर तदर्थ नियुक्ति करें।’
 

विधानसभा में नियुक्ति कर्मियों को नौ तक नियमित न करें 

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nainital high court - फोटो : google
नैनीताल हाइकोर्ट ने उत्तराखंड विधानसभा में 158 पदों पर नियुक्तियों में हुई धांधली के मामले में प्रदेश सरकार को निर्देशित किया है कि वह 2016 में नियुक्त कर्मचारियों को नौ अक्तूबर तक नियमित न करें। साथ ही कोर्ट ने याची को प्रति शपथपत्र दाखिल करने को कहा है। याची के मुताबिक विधानसभा में नियम विरुद्ध हुईं नियुक्तियां तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के कार्यकाल में हुई थीं।
  
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई हुई। बागेश्वर निवासी राजेश चंदोला ने हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा कि कांग्रेस सरकार ने पिछले साल विधानसभा में16 से 22 दिसंबर के बीच 158 पदों पर नियुक्तियां की थी। याचिका में कहा गया कि तत्कालीन सरकार ने अपने चहेतों को नियुक्ति देने के लिए विधानसभा नियमावली का उल्लंघन किया था।

नियमों को ताख पर रखकर चपरासी से लेकर अपर निजी सचिव, निजी सचिव के पदों पर नियुक्ति दी गई थी। याचिकाकर्ता ने इन नियुक्तियों को अवैध बताकर निरस्त करने की अर्जी लगाई थी। पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरकार को इन नियुक्तियों को नौ अक्टूबर तक नियमित न करने का निर्देश दिया है। इसकी अगली सुनवाई नौ अक्तूबर को होगी।
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