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फहराते ही तिरंगा उतार ले गए जिंदल ग्रुप के बाउंसर
ब्यूरो / अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा)
Updated Thu, 28 Jan 2016 05:55 PM IST
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गणतंत्र बचाओ, नानीसार बसाओ कार्यक्रम के तहत 26 जनवरी को स्वतंत्रता सेनानी देवेंद्र सनवाल के नेतृत्व में आंदोलनकारी अल्मोड़ा के नारीसार पहुंच गए। इस बीच उनकी पुलिस से तीखी झड़प हुई।
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आखिर उन्हें तिरंगा फहराने की अनुमति दे दी गई, लेकिन कुछ देर बाद ही जिंदल ग्रुप के बाउंसर तिरंगा उतार ले गए। इससे आंदोलनकारी गुस्सा उठे, प्रशासन ने बमुश्किल उन्हें शांत कराया। आंदोलनकारियों ने गेट के बाहर सभा की और झूठे मुकदमे वापस लेने और नानीसार से कब्जा हटाने की मांग की।
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26 जनवरी को नानीसार में नानीसार बचाओ संघर्ष समिति, उपपा, क्रांतिकारी जनवादी मोर्चा के आह्वान पर कुमाऊं और गढ़वाल से कई आंदोलनकारी पहुंचे। द्वारसों से आंदोलनकारी जनगीत गाते हुए पैदल नानीसार की ओर कूच कर गए। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात की गई थी।
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100 से अधिक महिला-पुरुष आंदोलनकारी ढोल-नगाड़ों के साथ नारेबाजी करते हुए अंतरराष्ट्रीय आवासीय विद्यालय के मुख्य गेट पर पहुंचे तो वहां मौजूद पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने बेरीकेडिंग कर रोक लिया।
आंदोलनकारी गेट के भीतर जाकर झंडा फहराने की जिद पर अड़े थे, इस बीच पुलिस के साथ आंदोलनकारियों की क्का-मुक्की और तीखी नोक-झोंक हुई। बाद में प्रशासन ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देवेंद्र सनवाल को अंदर आकर झंडा फहराने की इजाजत दी। जैसे ही श्री सनवाल ने झंडा फहराया तो जिंदल ग्रुप के नकाबपोश बाउंसरों ने झंडा उखाड़ा और लपेटकर अपने साथ ले गए। प्रशासन के अधिकारी यह सब खामोश देखते रहे।
ग्रामीणों ने इसे तिरंगे का अपमान बताते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। इससे टकराव की नौबत आ गई, तब प्रशासन ने बमुश्किल ग्रामीणों को समझाया। उसके बाद गेट के बाहर आंदोलनकारियों ने सभा की। कहा कि यदि उपपा केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी सहित तमाम आंदोलनकारियों से मुकदमे नहीं हटाए गए और नानीसार से जिंदल समूह का अवैध कब्जा नहीं हटा तो आंदोलनकारी ही कब्जा हटाएंगे।
झंडे का अपमान नहीं किया गया। बाउंसर झंडे को लपेटकर अपने साथ ले गए। फहराने के बाद तिरंगे को उतारने का कोई समय निर्धारित नहीं है। हां, रात्रि में झंडा नहीं लहराया जाना चाहिए।
- विनीत कुमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट रानीखेत