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जौनसार : परिवहन निगम की पांच बसों पर डेढ़ लाख की आबादी निर्भर
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जौनसार बावर के विभिन्न रूटों पर बीते सात साल से प्राइवेट बसों का संचालन ठप है। वर्ष 2017 में हिमाचल प्रदेश के गूमा में हुए भीषण बस हादसे के बाद से बसों का संचालन बंद हैं।
क्षेत्र की करीब डेढ़ लाख की आबादी परिवहन निगम की महज पांच बसों पर निर्भर है। यह बसें भी प्रमुख रूटों पर ही दौड़ती है। जिस कारण परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से छोटे वाहनों पर निर्भर है। त्योहारों के दौरान हमेशा क्षेत्र में बसों की कमी महसूस होती है। लोगों को ओवरलोड वाहन में सफर करना पड़ता है। जिससे हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोग रूटों पर प्राइवेट बसों के संचालन की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में परिवहन विभाग ने 12 से अधिक बस को परमिट जारी किए हुए हैं, लेकिन एक भी बस का संचालन नहीं हो रहा है। सवारियों की कमी से घाटे का हवाला देते हुए बस ऑपरेटरों ने धीरे-धीरे बसें चलानी बंद कर दी। वर्ष 2017 में हिमाचल के गूमा में हुए हादसे के बाद से बसों का संचालन पूरी तरह से बंद हो गया। हादसे में 45 लोगों की मौत हो गई थी।
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इन रूटों पर दौड़ती थी प्राइवेट बसें
विकासनगर से हाजा, दसऊ, क्वानू, चकराता, माक्टी, क्वांसी, गौराघाटी, बेसोगीलानी, त्यूणी, कथियान, कोटी, रजाणू समेत एक दर्जन से अधिक रूट पर बसों का संचालन होता था, जिन्हें एक-एक कर बंद कर दिया गया।
जौनसार बावर के अधिकांश गांव संपर्क मार्ग पर स्थित हैं। संपर्क मार्ग बड़े वाहनों के लिए नहीं हैं। सरकार को इन मार्ग की क्षमता बढ़ा कर इनमें बसों का संचालन करना चाहिए। - भीमदत्त वर्मा, स्थानीय निवासी
बूढ़ी दीवाली और अन्य त्योहारों के दौरान वाहनों के लिए मारामारी मचती है। विभिन्न रूटों पर बसों का संचालन जरूरी है। इससे छोटे वाहनों पर भी सवारियों का दबाव कम होगा। - सुरेंद्र चौहान, स्थानीय निवासी
बसों के संचालन को लेकर लगातार बस मालिकों से वार्ता की जा रही है। चुनाव के बाद फिर से उनसे वार्ता की जाएगी। रूट पर बसें न चलाने पर परमिट निलंबन की संस्तुति की जाएगी। - रावत सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन
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क्षेत्र की करीब डेढ़ लाख की आबादी परिवहन निगम की महज पांच बसों पर निर्भर है। यह बसें भी प्रमुख रूटों पर ही दौड़ती है। जिस कारण परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से छोटे वाहनों पर निर्भर है। त्योहारों के दौरान हमेशा क्षेत्र में बसों की कमी महसूस होती है। लोगों को ओवरलोड वाहन में सफर करना पड़ता है। जिससे हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है।
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स्थानीय लोग रूटों पर प्राइवेट बसों के संचालन की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में परिवहन विभाग ने 12 से अधिक बस को परमिट जारी किए हुए हैं, लेकिन एक भी बस का संचालन नहीं हो रहा है। सवारियों की कमी से घाटे का हवाला देते हुए बस ऑपरेटरों ने धीरे-धीरे बसें चलानी बंद कर दी। वर्ष 2017 में हिमाचल के गूमा में हुए हादसे के बाद से बसों का संचालन पूरी तरह से बंद हो गया। हादसे में 45 लोगों की मौत हो गई थी।
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इन रूटों पर दौड़ती थी प्राइवेट बसें
विकासनगर से हाजा, दसऊ, क्वानू, चकराता, माक्टी, क्वांसी, गौराघाटी, बेसोगीलानी, त्यूणी, कथियान, कोटी, रजाणू समेत एक दर्जन से अधिक रूट पर बसों का संचालन होता था, जिन्हें एक-एक कर बंद कर दिया गया।
जौनसार बावर के अधिकांश गांव संपर्क मार्ग पर स्थित हैं। संपर्क मार्ग बड़े वाहनों के लिए नहीं हैं। सरकार को इन मार्ग की क्षमता बढ़ा कर इनमें बसों का संचालन करना चाहिए। - भीमदत्त वर्मा, स्थानीय निवासी
बूढ़ी दीवाली और अन्य त्योहारों के दौरान वाहनों के लिए मारामारी मचती है। विभिन्न रूटों पर बसों का संचालन जरूरी है। इससे छोटे वाहनों पर भी सवारियों का दबाव कम होगा। - सुरेंद्र चौहान, स्थानीय निवासी
बसों के संचालन को लेकर लगातार बस मालिकों से वार्ता की जा रही है। चुनाव के बाद फिर से उनसे वार्ता की जाएगी। रूट पर बसें न चलाने पर परमिट निलंबन की संस्तुति की जाएगी। - रावत सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन