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जय महासू के उद्घोषों से गुंजायमान हुआ जौनसार-बावर
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महासू मंदिर थैना में जागड़ा के पर्व पर उमड़ा आस्था का सैलाब।
- फोटो : VIKAS NAGAR
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जय महासू...जय महासू...के गगनभेदी उद्घोषों से सोमवार को जौनसार-बावर की फिजाएं गुंजायमान हो उठी। ढोल-दमाऊ की थाप पर हर तरफ लोग जागड़ा पर्व के उल्लास में डूबे नजर आए। गणेश चतुर्थी और भाद्रपद शुक्ल पक्ष की हरितालिका तीज पर आयोजित जागड़ा पर्व पर देवता की वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा-अर्चना की गई। मंदिरों में देर शाम तक श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। इससे पहले रातभर जागकर लोगों ने देवता की स्तुति की। सोमावर की सुबह लोगों ने देव चिह्नों के दर्शन कर सुख और समृद्धि की कामना की।
पंचरा भंजरा स्थित चालदा महासू चालदा मंदिर में दोपहर 12 बजे देव चिह्नों और पालकी को स्नान के लिए भंजरा खड्ड पर ले जाया गया। मंदिर वापसी के बाद देव पालकी को नचाया गया। दोपहर के समय मंदिर परिसर में भंडारे का भी आयोजन हुआ। गबेला स्थित महासू देवता मंदिर में कुकुरसी महाराज की पालकी को देव स्नान के लिए ले जाया गया। रात में मंदिर परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। लोक गायिका रेखा खन्ना ने महासू वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। भंजरा स्थित मंदिर में इस अवसर पर पुजारी भोपालदत्त शर्मा, बजीर दिगंबर सिंह, भंडारी भगत सिंह, प्रताप सिंह बिष्ट, रिठन सिंह चौहान, बहादुर सिंह बिष्ट, वीरेंद्र सिंह पंवार, दीवान सिंह पंवार, सूरत सिंह, प्रताप सिंह बिष्ट, सुरेंद्र सिंह चौहान, सुरेंद्र सिंह पंवार, प्रताप सिंह राणा, चमन सिंह राणा, नारायण पंावर, जवाहर सिंह पंवार, चमन सिंह बिष्ट आदि मौजूद रहे।
थैना स्थित चालदा महासू मंदिर में भी वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच देव पालकी को गृभ गृह से बाहर निकाला गया। जिसके बाद पालकी को स्नान कराया गया। लोगों ने देव दर्शन कर सुख और समृद्धि की कामना की। मंदिर को फूलों से सजाया गया। इसके साथ ही बाशिक देवता मेंद्रथ, टुंगरा, पबासी देवता ठडिया, शेड़कुड़िया देवता रायगी, चालदा देवता थरोच, लखवाड़, थैना, चिल्हाड़ में भी पर्व की धूम रही। सभी जगहों पर देव पालकी को स्नान के लिए पवित्र जल धारा ले जाया गया। लखस्यार स्थित मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। राधा-कृष्ण, शिव पार्वती की झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया।
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पंचरा भंजरा स्थित चालदा महासू चालदा मंदिर में दोपहर 12 बजे देव चिह्नों और पालकी को स्नान के लिए भंजरा खड्ड पर ले जाया गया। मंदिर वापसी के बाद देव पालकी को नचाया गया। दोपहर के समय मंदिर परिसर में भंडारे का भी आयोजन हुआ। गबेला स्थित महासू देवता मंदिर में कुकुरसी महाराज की पालकी को देव स्नान के लिए ले जाया गया। रात में मंदिर परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। लोक गायिका रेखा खन्ना ने महासू वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। भंजरा स्थित मंदिर में इस अवसर पर पुजारी भोपालदत्त शर्मा, बजीर दिगंबर सिंह, भंडारी भगत सिंह, प्रताप सिंह बिष्ट, रिठन सिंह चौहान, बहादुर सिंह बिष्ट, वीरेंद्र सिंह पंवार, दीवान सिंह पंवार, सूरत सिंह, प्रताप सिंह बिष्ट, सुरेंद्र सिंह चौहान, सुरेंद्र सिंह पंवार, प्रताप सिंह राणा, चमन सिंह राणा, नारायण पंावर, जवाहर सिंह पंवार, चमन सिंह बिष्ट आदि मौजूद रहे।
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थैना स्थित चालदा महासू मंदिर में भी वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच देव पालकी को गृभ गृह से बाहर निकाला गया। जिसके बाद पालकी को स्नान कराया गया। लोगों ने देव दर्शन कर सुख और समृद्धि की कामना की। मंदिर को फूलों से सजाया गया। इसके साथ ही बाशिक देवता मेंद्रथ, टुंगरा, पबासी देवता ठडिया, शेड़कुड़िया देवता रायगी, चालदा देवता थरोच, लखवाड़, थैना, चिल्हाड़ में भी पर्व की धूम रही। सभी जगहों पर देव पालकी को स्नान के लिए पवित्र जल धारा ले जाया गया। लखस्यार स्थित मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। राधा-कृष्ण, शिव पार्वती की झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया।
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