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उत्तराखंड: कूड़े से बिजली बनाकर आत्मनिर्भर बनेगी जसपुर की पेपर मिल, यूपीसीएल के अड़ंगे पर आयोग ने दी राहत

Wed, 14 Oct 2026 01:34 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Wed, 14 Oct 2026 01:34 PM IST
सार

अब कूड़े से बिजली बनाकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करेगी जसपुर की विश्वनाथ पेपर मिल। ग्रीन एनर्जी प्लांट लगाने के बाद ग्रिड से बिजली की खपत घटने पर कंपनी ने कनेक्शन का स्वीकृत लोड कम करने की मांग की थी, जिसे यूपीसीएल ने खारिज कर दिया। 

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Jaspur paper mill to generate 6 MW power from waste UERC allows electricity load reduction uttarakhand News
बिजली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जसपुर की विश्वनाथ पेपर मिल अब कूड़े से बिजली बनाकर आत्मनिर्भर बनेगी। यूपीसीएल का अड़ंगा खत्म करते हुए उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने साफ कर दिया है कि ग्रीन एनर्जी लगाने वालों पर पुराने नियम नहीं थोपे जा सकते हैं।

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ऊधम सिंह नगर के जसपुर स्थित विश्वनाथ पेपर मिल हर महीने करीब 25 लाख यूनिट बिजली ग्रिड से लेती थी। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के वेस्ट-टू-एनर्जी कार्यक्रम के तहत कंपनी ने अपने परिसर में 40 टीपीएच बॉयलर और छह मेगावाट क्षमता का टर्बो-जनरेटर प्लांट स्थापित किया। इस वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के चालू होते ही कंपनी की ग्रिड बिजली पर निर्भरता लगभग खत्म हो गई। उसका मासिक ग्रिड उपभोग 25 लाख यूनिट से घटकर महज 31 हजार यूनिट के आसपास रह गया। प्लांट के संचालन से पहले ही कंपनी ने आठ सितंबर 2025 को यूपीसीएल को सूचना देकर अपना लोड 4700 किलोवाट से घटाकर 1250 किलोवाट करने का अनुरोध किया था।

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यूपीसीएल को दो महीने का अग्रिम नोटिस
यूपीसीएल ने सप्लाई कोड रेगुलेशन के क्लॉज 4.1.1(12) का हवाला देकर लोड घटाने से साफ इन्कार कर दिया। यूपीसीएल का तर्क था कि लोड तभी घट सकता है, जब आवेदन की तारीख से पहले के चार महीनों का वास्तविक उपभोग कम रहा हो। इससे परेशान कंपनी ने आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने मामले की सुनवाई की। उन्होंने यूपीसीएल के रुख को अनुचित ठहराया।

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पीठ ने स्पष्ट किया कि चार माह की निगरानी का नियम उन उपभोक्ताओं के लिए है, जो बिल बचाने के लिए हेरफेर करते हैं। जिन्होंने स्थायी रूप से अपना खुद का पावर प्लांट लगा लिया है, उन्हें सामान्य श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। आयोग ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए माना कि ऐसे मामलों में यूपीसीएल को दो महीने का अग्रिम नोटिस मिलना पर्याप्त है।

यूपीसीएल को निर्देश दिया गया कि कंपनी का अनुबंध लोड 4700 किलोवाट से घटाकर 1250 किलोवाट किया जाए और यह संशोधन आठ नवंबर 2025 से प्रभावी माना जाए। पिछली अवधि में लिए गए फिक्स चार्ज का समायोजन करना होगा। यूपीसीएल को पेपर मिल की ओर से जमा की गई करीब 2.48 करोड़ की सिक्योरिटी डिपॉजिट का नए लोड के अनुसार पुनर्मूल्यांकन कर अतिरिक्त धनराशि 15 दिनों के भीतर लौटानी होगी।
 

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