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जानिए, कैसे सुनामी के कहर से बचने के लिए भारत को कॉपी कर रहा जापान

Fri, 19 May 2017 08:37 AM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 19 May 2017 08:37 AM IST
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japan copying india to avoid the havoc of Tsunami
tsunami

सुनामी से बचने के तमाम तरीके खोजे जा रहे हैं। जापान अपने खासकर पूर्वोत्तर तट को सुनामी के नुकसान से बचाने के लिए भारत की तकनीक को कॉपी कर रहा है। 

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जापान पूर्वोत्तर तट पर दीवार बना रहा है, लेकिन भारतीयों ने सुनामी से बचने के लिए एक-दो नहीं बल्कि हजारों साल पहले तरीका खोजा दिया था।

गुजरात के धौलावीरा (कच्छ क्षेत्र) में करीब छह हजार साल पुरानी दीवार मिली थी। वैज्ञानिकों के अनुसार यह इलाका सुनामी प्रभावित था, जिससे बचने के लिए यह दीवार बनाई गई।
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वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालय जियोलॉजी में शुरू हुई नेशनल जियो रिसर्च स्कालर मीट-2017 में शामिल होने आए भूतपूर्व प्रमुख वैज्ञानिक एवं प्रमुख समुद्रीय भू-गर्भशास्त्र रहे डा. राजीव निगम ने यह जानकारी दी है।

उन्होंने बताया कि धौलावीरा में 20 साल पहले आर्कियोलॉजी सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) ने एक साइट को खोजा था, उस वक्त वहां एक दीवार मिली थी।

यह दीवार क्यों बनी थी? किस के लिए बनी थी? उसका उत्तर एएसआई को नहीं मिल पाया था। इसके बाद उनके विभाग ने अध्ययन शुरू किया।

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जो साइट थी, वह किलानुमा थी, जिसमें लोग रहते थे। यह किला समुद्र से करीब दो किमी की दूरी पर स्थित था। यह क्षेत्र सुनामी प्रभावित था, जहां अक्सर सुनामी आती थी।

ऐसे में लोगों को सुनामी के कहर से बचाने के लिए किले के चारों तरफ 15 से 18 मीटर चौड़ी दीवार बनाई गई थी। यह दीवार 5000 से 6000 हजार साल पुरानी है। भारतीय प्राकृतिक आपदाओं से बचाव करना जानते थे।

इसी तरह भारत- श्रीलंका के समुद्र में ब्रिज की बात है, वह भी काफी हद तक सही हो सकती है। क्योंकि एक अनुमान लगाया गया है कि भगवान राम का जन्म करीब सात हजार साल वर्ष पूर्व हुआ होगा। उस वक्त के हिसाब से मौजूदा समुद्र का जो तल है, वह सात हजार साल पहले दो से तीन मीटर नीचे रहा होगा, ऐसे में दोनों जगह को जोड़ने के लिए ब्रिज बना हो। 

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