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जन-धन के चक्कर में चकराई जनता
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 14 Sep 2014 10:48 AM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेशक प्रमाण-पत्रों का बोझ कम करने के लिए स्व-हस्ताक्षर प्रणाली पर भरोसा जता चुके हैं। बैंक वाले नहीं जता रहे। उन्होंने जन-धन योजना के तहत खुल रहे खातों में नामांकित व्यक्ति तक का प्रमाण मंगवाया।
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लोगों पता नहीं जन-धन योजना क्या है...
दिन-28 अगस्त, स्थान-इलाहाबाद बैंक
देहरादून के संदलवुड स्कूल से शिक्षिकाओं को बैंक लाया गया था, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी जन-धन योजना की शुरुआत भव्य बन सके।
खाता खुलवाने वालों की भीड़ लगी भी, लेकिन ज्यादातर ऐसे थे, जिन्हें मालूम ही नहीं था कि खाता खुलवाकर क्या होने वाला है? कुछ तो इसी भीड़ का हिस्सा बन अपने घर से बहुत दूर चले आए थे। साफ था कि ट्रांजेक्शन का कोई इरादा भी नहीं था।
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15 दिन बाद :13 सितंबर
पंजाब नेशनल बैंक की एस्लेहाल शाखा में नौकरी से फुर्सत पा दोपहर के वक्त खाता खुलवाने पहुंचे दो बुजुर्गों को इसलिए लौटना पड़ा, क्योंकि वहां जिन कर्मचारियों को जन-धन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वह सीट पर नहीं थे।
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कुछ अपनी जानकारी के मुताबिक फार्म पर फोटो चस्पा कर पहुंचे तो थे, लेकिन साथ में राशन कार्ड की कापी नत्थी कर दी थी। कहा तो गया था कि इसकी भी जरूरत नहीं होगी, केवल इनकम सेल्फ अटेस्ट करनी होगी, लेकिन आईडी से लेकर, हस्ताक्षर तक को लोग परेशान हुए।
पहले दिन के मुकाबले बहुत पिछड़े
15 दिन पहले जिस दिन जन-धन योजना की आधिकारिक शुरुआत हुई, उस दिन के मुकाबले बाद के दिनों में हर रोज तकरीबन 30 प्रतिशत तक की खाते खोले जा रहे हैं।
बैंक में जिनको काम सौंपा गया है, किसी भी शाखा में वह नदारद रहे हैं, ऐसा संज्ञान में नहीं है। अगर इस तरह की कोई शिकायत आती है तो उस पर तुरंत कार्रवाई कराई जाएगी।
- अश्विनी वत्स, मंडल प्रमुख, पंजाब नेशनल बैंक
जितने भी ग्राहक जन-धन के तहत खाता खुलवाने आ रहे हैं, उनसे किसी तरह का अतिरिक्त कागज नहीं मांगा जा रहा। नामांकित व्यक्ति को भी किसी तरह के प्रमाण की जरूरत नहीं।
- रमेश कुमार, शाखा प्रबंधक, स्टेट बैंक आफ इंडिया