सड़क पर जैन समाज, 'संथारा आत्महत्या नहीं आत्मसाधना'
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राजस्थान में संथारा को आत्महत्या बताते हुए कोर्ट की ओर से रोक लगाने के निर्णय के विरोध में सोमवार को देहरादून में जैन समुदाय ने मौन जुलूस निकाला। हाथों में काली पट्टी बांधे जैन समाज के करीब तीन हजार लोगों ने जुलूस में शामिल होकर डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया।
क्षुल्लक समर्पण सागर महाराज के सानिध्य में मौन जुलूस जैन धर्मशाला से शुरू होकर जिला मुख्यालय पहुंचा। यहां आयोजित सभा में दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष सुरेश चंद्र जैन ने कहा कि संथारा आत्महत्या नहीं बल्कि आत्म साधना है।
जैन ग्रंथों में इसका स्पष्ट वर्णन है, जिसमें कहा गया है कि जब जैन मुनियों को यह आभास हो जाता है कि उनकी मृत्यु निकट है तो वे कुछ दिन पहले एक कमरे में बंद हो जाते हैं और भोजन त्याग देते हैं। साथ ही साधना में लीन हो जाते हैं। साधना करते-करते ही वह समाधि को प्राप्त हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इस महान धार्मिक परंपरा को आत्महत्या की संज्ञा देना न्यायोचित नहीं है। ज्ञापन देने वालों में श्री दिगंबर जैन समाज के महामंत्री नेमचंद्र जैन, चंद्रसेन जैन, प्रवीन, अशोक, राजीव, कल्पना, पिंकी, अल्का, मंजू जैन आदि शामिल थे।
काम से ली छुट्टी, दिन-रात दुकानें रखीं बंद
मौन जुलूस के लिए जैन समाज के लोग विकासनगर, ऋषिकेश, हरिद्वार आदि जगहों से पहुंचे। खास बात यह रही कि इस जुलूस में शामिल होने के लिए जैन समाज के व्यापारियों ने जहां पूरे दिन और रात दुकानें बंद रखी, वहीं नौकरीपेशा लोगों ने छुट्टी ली।
यहां तक कि लोगों ने अपने बच्चों को भी स्कूल नहीं भेजा। एसबीआई बैंक में कार्यरत रमेश चंद्र जैन ने बताया कि दो दिन पहले छुट्टी की अर्जी लगा दी थी। बताया कि सभी लोगों ने इस जुलूस के लिए छुट्टी ली। व्यापारी प्रवीण जैन ने बताया कि 24 घंटे दुकान बंद रखी। बताया कि पलटन बाजार के अधिकतर व्यापारियों ने दुकानें बंद रखी।
नहीं दिए किराए पर कमरे
संथारा प्रथा के पक्ष में सोमवार को धर्मशाला का एक कमरा भी किराया पर नहीं दिया गया। कई लोग यहां सस्ते कमरे की आस में पहुंचे भी, लेकिन उन्हें धर्मशाला प्रबंधन की ओर से लौटा दिया गया।
स्कूल रहे बंद
जैन समाज के स्कूल भी सोमवार को बंद रहे। वर्णी जैन, महावीर कन्या पाठशाला, बालिका शिक्षा सदन में पढ़ने वाले करीब दो हजार बच्चे छुट्टी पर रहे। कुछ ने जुलूस में भी अपनी भागीदारी निभाई।