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विश्व धरोहर बन सकता है उत्तराखंड का जागेश्वर धाम
Updated Fri, 21 Nov 2014 04:04 PM IST
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दीप जोशी/ अमर उजाला, अल्मोड़ा
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने जागेश्वर धाम को विश्व हेरिटेज साइट की सूची में शामिल करने के लिए यूनेस्को को प्रस्ताव भेजने का फैसला किया है।
विश्व धरोहरों में शामिल होने वाली राज्य की पहली सांस्कृतिक धरोहर
इसके लिए एएसआई पहले जागेश्वर मंदिर समूह को संभावित सूची में शामिल करने के लिए आवेदन करेगी। उसके बाद यूनेस्को की विशेषज्ञ टीम इस बारे में निर्णय लेगी। यदि भविष्य में जागेश्वर मंदिर समूह को विश्व धरोहरों में शामिल कर लिया गया तो यह राज्य की पहली सांस्कृतिक धरोहर होगी।
इस समय भारत में कुल 32 धरोहरें विश्व हेरिटेज साइट की सूची में हैं। इनमें 25 सांस्कृतिक और सात प्राकृतिक धरोहर हैं। उत्तराखंड की कोई भी सांस्कृतिक धरोहर इसमें शामिल नहीं है। हालांकि नंदादेवी पर्वत और फूलों की घाटी प्राकृतिक धरोहर के तौर पर इस सूची में शामिल है।
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एएसआई के अधिकारियों का मानना है कि जागेश्वर मंदिर समूह में विश्व धरोहर सूची में शामिल होने की सभी खूबियां हैं, इसलिए एएसआई ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने का फैसला किया है। उत्तराखंड के अधीक्षण पुरातत्व विद् अतुल भार्गव ने बताया कि इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक राकेश तिवारी काफी गंभीर हैं।
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भार्गव ने बताया कि किसी भी स्मारक को विश्व धरोहर के तौर पर शामिल करने से पहले विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल होना जरूरी है। इसलिए पहले संभावित सूची में शामिल करने के लिए निर्धारित फॉरमेट में आवेदन किया जाएगा।
यह स्मारक इतना महत्वपूर्ण क्यों है और इसके सभी तथ्यों का विवरण दिया जाएगा। इसके बाद यूनेस्को के अंतर्गत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मोनोमेंट्स एंड साइट्स (ईकोमोस) अपने विशेषज्ञों को जागेश्वर भेजेगी और उनकी रिपोर्ट के बाद इस बारे में फैसला होगा।
124 छोटे-बड़े मंदिर हैं जागेश्वर में
जागेश्वर मंदिर समूह का निर्माण कत्यूरी राजाओं के शासनकाल में सातवीं से सत्रहवीं शताब्दी के मध्य हुआ है। कत्यूरी शासक खुद को परम महेश्वर कहते थे और वह खुद को शिव के परम भक्त मानते थे। मान्यताओं के मुताबिक जागेश्वर में स्थापित शिवलिंग बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक है।
यह भी मान्यता है कि जगद्गुरुआदि शंकराचार्य ने इस स्थान का भ्रमण किया और इस मंदिर की मान्यता को पुनर्स्थापित किया। जागेश्वर मंदिर नागर शैली का है। यहां स्थापित मंदिरों की विशेषता यह है कि इनके शिखर में लकड़ी का बिजौरा (छत्र) बना है।
जागनाथ मंदिर में भैरव को द्वारपाल के रूप में अंकित किया गया है। जागेश्वर लकुलीश संप्रदाय का भी प्रमुख केंद्र रहा। जागेश्वर मंदिर समूह के अंतर्गत शिव, महामृत्युंजय, लकुलीश, केदारेश्वर, बालेश्वर, पुस्टिदेवी सहित छोटे बड़े 124 मंदिर हैं।
दुनिया में 981 विश्व धरोहरें
वर्तमान में दुनिया में 981 विश्व धरोहरें हैं। इनमें 759 सांस्कृतिक और 193 प्राकृतिक धरोहर हैं। भारत में कुल 32 विश्व धरोहर हैं। इनमें 25 सांस्कृतिक और सात प्राकृतिक धरोहर हैं।
भारत में प्रमुख सांस्कृतिक धरोहरों में ताजमहल, कुतुबमीनार, लाल किला, बोधगया का महाबोधि मंदिर, कोणार्क का सूर्य मंदिर, सांची (मध्यप्रदेश), पुरानी गोवा की चर्च, खजुराहो के मंदिर, फतेपुर सीकरी, आगरा का किला, भीमबेटिका के शैलचित्र, अजंता की गुफाएं आदि प्रमुख हैं।