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एवलांच के खतरों के बीच भी चौकसी कर रहे ये जांबाज
सूरत सिंह रावत/ अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Mon, 30 Jan 2017 12:15 PM IST
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- फोटो : Demo Pic
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यहां सीमा पर तैनात जवान एवलांच के खतरों के बीच नियमित पेट्रोलिंग कर रहे हैं। जिले में चीन सीमा को जोड़ने वाली 91 किमी सड़क बर्फ से ढक गई है।
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आईटीबीपी के सेनानी ने अपने जवानों से अग्रिम पोस्टों की ओर जाने वाली बर्फ से ढकी सड़क को यथासंभव यातायात लायक तैयार करने को कहा है।
भारतीय सीमा में अग्रिम पोस्ट थागला एक और दो, टीसांचकुला तथा मुनिंगला पास की ओर भैंरोघाटी से आगे 91 किमी सड़क बर्फ से ढक गई है। इससे आगे रॉकी नाला होते हुए 5632 मी. ऊंचाई वाले मुनिंगला दर्रे वाली पोस्ट तक 34 किमी दुरूह पगडंडी से होकर गुजरना पड़ता है।
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5856 मीटर की ऊंचाई पर स्थित थागला एवं टीसांचकुला चौकी तक पहुंचने के लिए भी पगडंडियों का ही सहारा है। गंगोत्री नेशनल पार्क की बंदिश के कारण सीमावर्ती क्षेत्र में 56 किमी सड़कों का प्रस्ताव नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड से दो वर्ष से ज्यादा समय से अटका है।
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यह बता दें कि चीन वर्षों पूर्व भारतीय सीमा पर हमारी अग्रिम पोस्टों से दो से चार किमी दूर अपनी सीमा तक सड़क तैयार कर चुका है। इस हालातों के बावजूद आईटीबीपी और सेना के जवान अपने विशेष प्रशिक्षण और देशभक्ति के जज्बे के साथ एवलांच के खतरों की चुनौतियों के बीच भारतीय सीमा की चौकसी करते आ रहे हैं।
पूर्व में मंडी सुमला और नागा जैसे एवलांच के खतरे में आने वाली पोस्टों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया जा चुका है। वैसे सीमा प्रहरियों के लिए आपातकालीन हेलीकाप्टरों का इंतजाम भी रहता है और बर्फ में पेट्रोलिंग व यहां की भौगोलिक परिस्थितियों में रहने के लिए जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं।
विभागीय स्तर से मुनिंगला, टीसांचकुला और थागला एक व दो अग्रिम चौकियों को जोड़ने वाली 56 किमी सड़कों का प्रस्ताव नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड तक पहुंचा दिया गया है। इन सड़कों के लिए 133.96 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
- श्रवण कुमार, उपनिदेशक गंगोत्री नेशनल पार्क
लगातार अग्रिम चौकियों पर जवानों से बात हो रही है। इस बार कम बर्फबारी की दशा में भी सीमावर्ती सड़क व पगडंडियों पर एक फीट बर्फ जमा है। जवानों के लिए तीन माह के राशन के अलावा अतिरिक्त कोटा भी पोस्टों में जमा है। एवलांच के खतरों के बीच हमारे जवानों का सुरक्षित पेट्रोलिंग का खासा अनुभव इस मौसम में काम आ रहा है।
- केदार सिंह रावत, सेनानी, आईटीबीपी मातली