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निवेश के नाम पर ठगी: हवाला और क्रिप्टो के जरिये विदेश भेजे गए पैसे, ईडी भी पूरे नेटवर्क की खंगाल रही कुंडली

Thu, 05 Nov 2026 11:22 PM IST
Alka Tyagi माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Thu, 05 Nov 2026 11:22 PM IST
सार

जांच के केंद्र में विदेश में बैठा मुख्य आरोपी लविश चौधरी है, जिस पर बोटब्रो, बोटअल्फा, क्रॉस मार्केट, माइन क्रिप्टो, मेटा ट्रेड-5, फाइनेंशियल फ्रीडम और टीएलसी कॉइन जैसी कंपनियों के माध्यम से निवेश का नेटवर्क संचालित करने का आरोप है।

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investment Fraud Funds siphoned abroad via hawala and crypto ED is also scrutinizing entire network
साइबर क्राइम - फोटो : freepik.com(प्रतीकात्मक)

विस्तार

ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर उत्तराखंड के लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले नेटवर्क की जांच अब केवल निवेशकों से रकम जुटाने और स्थानीय स्तर पर लोगों को जोड़ने तक सीमित नहीं रह गई है। इस नेटवर्क से जुड़े पैसों के लेन-देन, विदेश में रकम भेजने और क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल के पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इस पूरे नेटवर्क की कुंडली खंगाल रहा है। उत्तराखंड एसटीएफ ने अपनी जांच में सामने आए तथ्यों और आरोपियों की भूमिका से जुड़ी जानकारी ईडी के साथ साझा की है।

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जांच के केंद्र में विदेश में बैठा मुख्य आरोपी लविश चौधरी है, जिस पर बोटब्रो, बोटअल्फा, क्रॉस मार्केट, माइन क्रिप्टो, मेटा ट्रेड-5, फाइनेंशियल फ्रीडम और टीएलसी कॉइन जैसी कंपनियों के माध्यम से निवेश का नेटवर्क संचालित करने का आरोप है। इन कंपनियों के जरिये लोगों को कम समय में अधिक मुनाफा कमाने, डॉलर में रिटर्न मिलने और विदेश यात्राओं का लालच दिया जाता था। एसटीएफ की जांच में सामने आया कि संबंधित कंपनियां आरबीआई और सेबी में पंजीकृत नहीं थीं।

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आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि जांच में निवेशकों से प्राप्त रकम के वास्तविक स्रोत और उसके गंतव्य का पता लगाने पर जोर है। इसके लिए अलग-अलग बैंक खातों के स्टेटमेंट, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और नकद लेन-देन की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। क्रिप्टोकरेंसी और डॉलर के माध्यम से किए गए लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है।

जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना अहम है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम किन खातों में पहुंची, वहां से किन माध्यमों से आगे भेजी गई और विदेश में बैठे मुख्य आरोपी तक इसका कितना हिस्सा पहुंचा। हवाला के संभावित इस्तेमाल और विदेश में धनराशि भेजे जाने से जुड़े पहलुओं को भी वित्तीय जांच के दायरे में रखा गया है। हालांकि, एसटीएफ की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में हवाला के जरिये भेजी गई रकम की मात्रा, संबंधित व्यक्तियों या किसी विशिष्ट लेन-देन का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण कड़ी निवेशकों से जुटाई गई रकम का अंतिम गंतव्य है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि रकम किन-किन खातों और माध्यमों से गुजरकर विदेश पहुंची। इसके साथ ही लविश चौधरी के सहयोगियों, नेटवर्क के शीर्ष पदों पर रहे लोगों और अलग-अलग कंपनियों के जरिये निवेश जुटाने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एसटीएफ और ईडी की वित्तीय जांच से इस नेटवर्क के आर्थिक ढांचे, विदेशों में संभावित संपत्तियों और धन के लेन-देन की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

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