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ऐसे करेंगे योगा तो नहीं होगा मोटापा
अमर उजाला, मुनिकीरेती, ऋषिकेश
Updated Tue, 04 Mar 2014 02:22 PM IST
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मुनिकीरेती गंगा रिसार्ट में अंतरराष्ट्रीय योगा वीक (महोत्सव) के तीसरे दिन साधकों को विभिन्न योग विधाओं का अभ्यास कराया गया।
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पानी में पुष्पयोग देख आश्चर्यचकित हुए साधक
सोमवार को योगा वीक के तहत हेमकुंड गुरुद्वारा में आयोजित कार्यक्रम में योगाचार्य बलराम ने योग साधकों को आश्चर्य में डाल दिया।
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उन्होंने तालाब में पानी के ऊपर पुष्पयोग द्वारा मगरमच्छ मुद्रा, पद्मासन, धनुरासन, पवन मुक्तासन आदि क्रियाओं का प्रदर्शन किया। करीब आधे घंटे पैर बांधकर पानी की सतह पर संतुलन बनाने के दौरान गीतापाठ भी किया।
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इससे पूर्व उन्होंने साधकों को पुष्पयोग आसान की बारीकियां बताई। बताया कि मानसिक स्वच्छता और संतुलन से पानी में योग की सिद्ध प्राप्त की जा सकती है।
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बताया कि पानी में पुष्प योग करने के लिए शरीर और मन का शुद्ध होना आवश्यक है। योग से मोटापा, वाद, पित्त, कफ, ज्वर आदि बीमारियां दूर हो जाती हैं।
ध्यान मुद्राओं की जानकारी दी
इस दौरान देसी-विदेशी साधक तनमयता से योग करते नजर आए। सोमवार को योगांजलि हॉल में यौगिक क्रियाओं की शुरुआत कॉस्मिक मेडिटेशन से हुई। योगाचार्य ब्रह्मऋषि पात्री ने साधकों को ध्यान मुद्राओं की जानकारी दी।
बताया कि कॉस्मिक मेडिटेशन से मानसिक शांति और ताजगी आती है। इसके बाद योगाचार्य सूर्येन्दु पुरी ने साधकों को सूर्य क्रिया योग कराया। बताया कि सूर्योदय के समय यौगिक क्रिया से शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है।
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महर्षि वशिष्ठ हॉल में आरएस भोगल ने क्रिया योग और डॉ. एलएन जोशी ने साधकों को शरीर में दर्द से निजात दिलाने के लिए विभिन्न योग मुद्राएं सिखाई। महर्षि गौतम हॉल में योगी गंगापुरी ने साधकों को कुंडलिनी योग की जानकारी दी।
विभिन्न योग विधाओं पर व्याख्यान
बताया कि कुंडलिनी योग से मन-मस्तिष्क और इंद्रियों पर नियंत्रण किया जा सकता है। महर्षि भारद्वाज हॉल में मारियन मास ने साधकों को हठयोग का प्रशिक्षण दिया। पद्मश्री सुरेश चतुर्वेदी, और धर्मेंद्र भाई ने विभिन्न योग विधाओं पर व्याख्यान दिए।
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मौके पर जीएमवीएन के प्रबंध निदेशक डॉ. आर राजेश कुमार, प्रबंधक सीएल सेमवाल, संयोजक स्वामी विशुद्धानंद, महाप्रबंधक बीएल राणा, वीडी पेटवाल, भानेश घिल्डियाल, धनपाल नेगी, बीएम बहुगुणा, विश्वनाथ बेंजवाल, सतीश खंडूड़ी, सुरेश पंवार, विजय नेगी, विनोद कोठियाल, रामस्वरूप नौटियाल, वीरेंद्र गुसाईं, सूर्यप्रकाश कोठारी आदि मौजूद थे।