महिलाएं आज न केवल पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहीं हैं, बल्कि कई जगह आगे बढ़कर नेतृत्व भी कर रहीं हैं। राजधानी दून में ही कई अहम विभागों की कमान महिला अफसरों के हाथों में हैै। यह महिला अफसर कहीं भी पुरुष अफसरों से उन्नीस नहीं हैं। कार्यकुशलता, विनम्र व्यवहार और अनुशासनप्रियता के कारण उनके अधीनस्थ अधिकारी-कर्मचारी और अन्य लोग भी उनका सम्मान करते हैं। महिला दिवस के खास मौके पर अमर उजाला ऐसी ही कुछ कर्मठ अफसरों की संक्षिप्त कहानियां प्रकाशित कर रहा है। 2015 बैच की आईएएस अफसर नितिका खंडेलवाल मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) और वर्तमान प्रभारी जिलाधिकारी के तौर पर कार्यरत हैं। मूलत: ऊधमसिंह नगर निवासी नितिका ने उत्तरकाशी में सेवा पूर्व प्रशिक्षण लिया। रुड़की ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के तौर पर उनके पहले कार्यकाल को लोग आज भी याद रखते हैं। दफ्तर पहुंचने वाले हर फरियादी की मदद करना और लंबित मुद्दों को निपटाने पर उनका विशेष फोकस रहता है। उनकी गिनती तुरंत फैसले लेने वाले अधिकारियों में होती है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : देहरादून में महिला अफसरों के हाथ अहम विभागों की कमान, तस्वीरें
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जिला समाज कल्याण अधिकारी हेमलता पांडेय सरकार की योजनाओं का लाभ सभी लोगों तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य सबको सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना है। समाज के अपवंचित और कमजोर वर्ग तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाने के लिए उनकी ओर से विशेष प्रयास भी किए जा रहे हैं, जिन्हें सराहा भी जा रहा है। जिला प्रशासन के तेजतर्रार अधिकारियों में उनका नाम शामिल है।
आशारानी पैन्यूली पिछले दो साल से मुख्य शिक्षाधिकारी का अहम जिम्मा संभाल रही हैं। सरकारी स्कूलों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की बात हो या फिर बेटियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने की, वह अहम भूमिका निभा रही हैं। अपवंचित वर्ग के बच्चों को स्कूली शिक्षा उपलब्ध कराने और प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगा लोगों को राहत देने पर उनका विशेष फोकस है।
प्रदेश के प्रतिष्ठित दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल महिला सशक्तीकरण का बड़ा उदाहरण हैं। पद संभालते ही उन्होंने शिक्षक व स्टाफ के संकट को दूर करने के लिए गंभीरता से प्रयास शुरू किए हैं। इससे पहले उन्होंने लंबे समय तक गढ़वाल केंद्रीय विवि में अपनी सेवाएं दीं। उनका मानना है कि हर पात्र छात्र को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिलने चाहिए।
तनु जैन पिछले दो वर्षों से बतौर सीईओ राजधानी के दो कैंट बोर्डों की जिम्मेदारी संभाल रहीं हैं। अगस्त 2019 में पद संभालने के बाद से उन्होंने दोनों कैंट बोर्ड में कई उल्लेखनीय काम किए हैं। इससे पहले वो शिमला और सुभातू कैंट बोर्ड सीईओ के तौर पर भी सेवाएं दे चुकी हैं। वो दून कैंट को देश का सबसे बेहतर और अच्छा बोर्ड बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।
2005 बैच की पीपीएस अधिकारी सरिता डोभाल वर्तमान में एसपी सिटी के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वह एसपी देहात की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। उनके नेतृत्व में शहर की पुलिस ने कानून व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के साथ ही कई आपराधिक घटनाओं का खुलासा भी किया है। खुशमिजाज व्यवहार और फरियादियों की मदद के चलते उन्हें अच्छे अधिकारियों में गिना जाता है।