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उत्तराखंड से पलायन की तैयारी में कई उद्योग
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 08 Feb 2016 11:17 AM IST
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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की धीमी रफ्तार से कई उद्योग उत्तराखंड से बाहर जाने की तैयारी कर रहे हैं। कुछ उद्योग उत्पादन लगातार कम कर रहे हैं।
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पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स ने तो प्रदेश सरकार को इस मामले को लेकर चेताया भी है। चैंबर पदाधिकारियों का साफ कहना है कि हीरो मोटो कार्प जैसी कंपनियां तक प्रदेश में उत्पादन को तेजी से कम रही हैं।2015 की ईज ऑफ डूइंग बिजनेंस रेटिंग में उत्तराखंड 23वें नंबर पर था। अब जून माह में फिर से यह रेटिंग होनी है।
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प्रदेश से उद्योगों के पलायन का मामला 2010 में विशेष औद्योगिक पैकेज के समाप्त होते ही उठा था। पैकेज के समाप्त होने केबाद नया निवेश तो प्रभावित हुआ पर अगले दस साल तक के टैक्स लाभ को देखते हुए उद्योग फिलहाल प्रदेश से बाहर की ओर रुख नहीं कर रहे हैं। लेकिन, अब हालात बदले हुए नजर आ रहे हैं।
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शनिवार को देर रात पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हरीश रावत से मुलाकात कर जो स्थिति बयां की वह चिंताजनक है। चैंबर के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश गुप्ता ने मुख्यमंत्री से मुलाकात में कहा कि कई उद्योग प्रदेश से पलायन करने की तैयारी कर रहे हैं। कई उद्योग अपना उत्पादन कम कर रहे हैं।
चैंबर के उत्तराखंड चैप्टर के क्षेत्रीय निदेशक अनिल तनेजा के मुताबिक हीरो मोटो कॉर्प प्रदेश में उत्पादन कम कर रहा है। स्टरलाइट ने उत्पादन बंद ही कर दिया है। पदाधिकारियों के मुताबिक अगर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तराखंड ने अपना प्रदर्शन नहीं सुधारा तो प्रदेश को नुकसान उठाना पड़ेगा।
अब ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की जून माह में रेटिंग होनी है। हाल यह है कि प्रदेश में अभी तक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत सिंगल विंडो का ऑनलाइन प्लेटफार्म तैयार नहीं हो पाया है।
श्रम विभाग सुधार के मामले में काफी पीछे हैं और खुद मुख्य सचिव एक बार श्रम विभाग को तेजी लाने की हिदायत दे चुके हैं। अनिल तनेजा के मुताबिक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत यह तय किया जाना है कि उद्योगों के लिए सामान्य रूप से काम करने में माहौल कितना सुविधाजनक है।
मामला सिर्फ इतना नहीं है कि हम अपने उद्योगों की समस्याओं का किस तरह से समाधान कर रहे हैं, मामला यह भी है कि अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड की स्थिति क्या है। अन्य राज्य अगर बेहतर सुविधाएं देंगे तो उद्योग वहां जाएंगे ही। ऐसे में राज्य को न सिर्फ अपने स्तर पर सुविधाजनक माहौल बनाना है, बल्कि उसे अन्य राज्यों से भी खुद को बेहतर साबित करना होगा।
- पंकज गुप्ता, अध्यक्ष, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तराखंड बिल्कुल निचले पायदान पर है। एकल खिड़की व्यवस्था को सुधारने की जरूरत है। सरकार अगर चाहती है कि उद्योग प्रदेश से बाहर न जाएं और प्रदेश को नया निवेश भी मिले तो जरूरी है कि उसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में अपनी स्थिति सुधारनी होगी।
- महेश गुप्ता, राष्ट्रीय अध्यक्ष, पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री
प्रदेश में औद्योगिक वातावरण के लिये हर संभव प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही सरकार उद्योगों को 24 घंटे बिजली देने की स्थिति में होगी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में प्रदेश को पांचवें स्थान पर लाने की कोशिश की जा रही है।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री
उद्योगों की समस्याएं
पारदर्शिता और सुशासन : उद्योगों की शिकायत है कि विभागों के स्तर पर उत्साह दिखाई नहीं देता। किसी भी समस्या का समाधान आसानी से नहीं होता और फैसला करने में खासी देरी होती है। विभागों ने वेबसाइट बनाई पर इन्हें उपयोगी बनाने पर जोर नहीं दिया।
बिजली : प्रदेश में उद्योगों को पांच घंटे तक की बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।
एकल खिड़की व्यवस्था : एकल खिड़की व्यवस्था अभी पटरी पर नहीं आ पाई है। बिजली और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से उद्योगों को सबसे बड़ी शिकायत है। कहा जा रहा है कि एक-एक मामले को कई बार छह-छह माह तक लंबित रखा जा रहा है।
कोई एक्जिट नीति नहीं: प्रदेश में कोई एक्जिट नीति नहीं है। अगर कोई उद्योग बंद होता है तो भी उसे छह माह तक बिजली का बिल भरना होगा। होटल जैसे उद्योग भी हैं जिनके लिए ऑफ सीजन बिजली का भार कम करने की कोई सुविधा नहीं है। जमीन से लेकर प्लांट एंड मशीनरी तक के मामले साल भर तक लटक जाते हैं।
श्रम सुधार: श्रम मामलों के निस्तारण में खासा समय लगना उद्योगों को अखर रहा है।