इंदिरा की स्पेशल कैबिनेट ने लिए दो बड़े फैसले, पढ़ें
- इंदिरा हृदयेश की स्पेशल कैबिनेट से मुख्यमंत्री को राहत
- अब एसआईटी करेगी जांच, मुख्य सचिव करेंगे टीम गठित
- कैबिनेट ने न्याय विभाग की नियमावली में भी किया संशोधन
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वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश की स्पेशल कैबिनेट ने मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग की जांच सीबीआई से कराने की अधिसूचना वापस लेने का निर्णय लिया है। इस प्रकरण की जांच राज्य की ओर से गठित एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) से कराई जाएगी।
कैबिनेट ने न्याय विभाग की नियमावली में संशोधन कर दिया गया है। सिविल जज जूनियर डिवीजन को अब सिविल जज सीनियर डिवीजन बनने में केवल चार साल ही लगेंगे। अभी तक पांच साल बाद यह पदोन्नति मिलती थी।
रविवार को कैबिनेट मंत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक को लेकर जो अटकलें लगाई गई थीं, वह सच साबित हुईं। ‘अमर उजाला’ ने इस बात का खुलासा भी रविवार को प्रकाशित संस्करण में किया था। कैबिनेट के फैसलों की ब्रीफिंग के दौरान मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि मंत्रिमंडल ने स्टिंग मामले में हरीश रावत के खिलाफ सीबीआई जांच वापस लेने का निर्णय हुआ है।
अब चार साल में बन सकेंगे जज सीनियर डिवीजन
कैबिनेट ने सीबीआई जांच के लिए जारी की गई राज्य सरकार की अधिसूचना को वापस ले लिया है। इस प्रकरण की जांच अब एसआईटी करेगी। एसआईटी के गठन के लिए कैबिनेट ने मुख्य सचिव को अधिकृत किया है।
पूछे जाने पर मुख्य सचिव ने तर्क दिया कि यह ऐसा मामला नहीं है कि जिसकी जांच राज्य की एजेंसी ना कर सके। सीबीआई को वह मामले दिए जाते हैं जिनकी व्यापक स्तर पर जांच कराने की गुंजाइश होती है। एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में कैबिनेट ने न्याय विभाग की नियमावली में संशोधन को मंजूरी दे दी है।
अभी तक सिविल जज जूनियर डिवीजन से सिविल जज सीनियर डिवीजन बनने में पांच वर्ष का समय जरूरी होता था, लेकिन कैबिनेट ने इसमें एक साल कम कर यह अर्हता चार वर्ष कर दी है। इससे दर्जनों न्यायिक अधिकारियों को लाभ मिलेगा। कैबिनेट ने राज्य लोक सेवा आयोग के 2013-14 व 2014-15 के वार्षिक प्रतिवेदन को भी सदन के पटल पर रखने की मंजूरी दे दी है।