भाजपा को इस आयरन लेडी से लेना होगा लोहा
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नैनीताल की पांच विधानसभा सीटें ऊधमसिंहनगर लोकसभा संसदीय क्षेत्र में आती हैं।
कालाढूंगी और भीमताल में जहां भाजपा का पलड़ा भारी दिखता है वहीं नैनीताल सीट शांत दिखती है।
लेकिन हल्द्वानी व लालकुआं पहुंचते ही लड़ाई रौचक हो जाती है। यहां पर मुसलिम फैक्टर भी अपना काम करता है।
फिलहाल हल्द्वानी में आयरन लेडी के नाम से मशहूर इंदिरा ह्दयेश की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। पेश है एक रिपोर्ट।
कहीं बिछी जीत की बिसात तो कहीं मोहरे पिटने का डर
ऊधमसिंहनगर लोकसभा सीट की पांच विधानसभा सीटें नैनीताल जनपद में हैं। हल्द्वानी में खासतौर पर आयरन लेडी के नाम से महशहूर कैबिनेट मंत्री इंदिरा ह्दयेश की भी अग्निपरीक्षा का वक्त है।
लेकिन जिम कार्बेट की तलहटी में बसी कालाढूंगी व भीमताल विधानसभा सीटों में जहां भाजपा के प्रति लोगों में गजब का उत्साह है वहीं पर हल्द्वानी लालकुआं तक आते आते लड़ाई रोचक होती दिखती है।
जबकि सबसे रोचक लड़ाई सरोवर नगरी नैनीताल में ही होनी है। फिलहाल भाजपा के भगत सिंह कोश्यारी और कांग्रेस के केसी सिंह बाबा ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी है।
निकाय चुनाव में हो गया था भाजपा का सूपड़ा साफ
नैनीताल नगर पालिका में पिछले स्थानीय निकाय चुनाव में सूपड़ा साफ हो गया था। पूरे बोर्ड में भाजपा का एक भी पार्षद नहीं है।
यहां पर नगर पालिका बोर्ड उक्रांद के कब्जे में है। स्थानीय निकाय के चुनाव से पहले हुए विधानसभा के चुनाव में नैनीताल सीट पर कांग्रेस की सरिता आर्य ने जीत दर्ज की।
लेकिन अब लोग भाजपा की बात करते नजर आते है। हालांकि 2007 में इरस सीट पर भाजपा के खड़क सिंह बोरा जीते थे। लेकिन पिछले भाजपा प्रत्याशी हेम आर्य को लोगों ने नकार दिया।
इसलिए इस सीट पर भाजपा का असर तो दिख रहा है लेकिन उसे वोट में बदलने के लिए सरोवर नगरी में कोई बड़ा नेता नजर नहीं आता। इसलिए यह सीट अभी नैनी झील की तरह शांत दिख रही है।
भवाली में बढ़े भाजपा के भाव
नैनीताल से भवाली की दूरी 11 किलोमीटर है। भवाली कस्बा नैनीताल विस सीट का हिस्सा है लेकिन यहां के शहरी निकाय पर भाजपा का कब्जा है।
नीना बिष्ट यहां से चेयरमैन है। इसलिए यहां पर भाजपा का असर दिखता है। गौला नदी के किनारे बसी भीमताल विधानसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है। यहां से विधायक दान सिंह भंडारी भी भाजपा के है।
नगर पंचायत भी भाजपा के कब्जे में है और जनता का प्रभाव भी भाजपा की तरफ दिख रहा है। आम जनता में स्थानीय विधायक की छवि भी भाजपा को लाभ दिलाएगी।
लेकिन मोदी लहर का असर नैनी झील से लेकर भीमताल, नौकुचियाताल सात ताल तक अहसास कराता है। लोग के जहन में महंगाई है और कांग्रेस का दस साल का काम।
हल्द्वानी से टकराती है तो चुनाव समीकरण बदले हुए नजर आने लगते है। यह कैबिनेट मंत्री इंदिरा ह्दयेश का क्षेत्र है। लेकिन यहां हुए नगर निगम चुनाव में भाजपा के जोगेंद्र रौतेला मेयर बने और कांग्रेस के हेमंत बगड़वाल तीसरे स्थान पर रहे।
जबकि सपा के मतीन सिद्दीकी प्रत्याशी केसी सिंह बाबा की हार और जीत दोनों का श्रेय इंदिरा को जाएगा। क्योंकि वह यहां से सीटिंग विधायक तो है ही, सरकार में हैवीवेट मिनिस्टर भी है।
नतीजों के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता
लालकुआं सीट से हरीश दुर्गापाल निर्दलीय विधायक है और कैबिनेट मिनिस्टर है। उन्हें इंदिरा ह्दयेश का करीबी माना जाता है।
लेकिन वह जिस वोट के सहारे जीते उसे कांग्रेस को ट्रांसफर करवा सकेंगे या नहीं, यह कहना मुश्किल है।
हालांकि उन्हें इंदिरा ह्दयेश का करीबी माना जाता है, इसलिए वह कांग्रेस के लिए काम तो कर रहे है लेकिन नतीजों के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
कालाढूंगी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक बंशीधर भगत की सक्रियता का फायदा पार्टी प्रत्याशी भगत सिंह कोश्यारी को मिलता दिख रहा है।
हालांकि यह सीट पहले से ही भाजपा का गढ़ मानी जाती है। हालांकि कुछ लोगों को इस बात की शिकायत भी है कि भगत भाखड़ा पुल से हल्द्वानी की तरफ ही ज्यादा काम कराते हैं।