{"_id":"598b43344f1c1b84228b460c","slug":"indian-jawan-body-did-not-reached-home","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू कश्मीर में शहीद हुए जवान का पार्थिव शरीर नहीं पहुंचा, घर में मचा कोहराम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू कश्मीर में शहीद हुए जवान का पार्थिव शरीर नहीं पहुंचा, घर में मचा कोहराम
ब्यूरो/अमर उजाला, गंगोलीहाट/पिथौरागढ़
Updated Wed, 09 Aug 2017 10:45 PM IST
विज्ञापन
pawan singh (file photo)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गंगोलीहाट के सुगड़ी (बेलपट्टी) के लाल शहीद पवन सुगड़ा (21) के घर में कोहराम मचा है। परिजनों के करुण क्रंदन से माहौल बेहद गमगीन हो गया।
विज्ञापन
शहीद का पार्थिव शरीर मौसम खराब होने के कारण बुधवार को उनके घर नहीं पहुंच पाया। पार्थिव शरीर सेना मुख्यालय बरेली में रखा गया है, जो बृहस्पतिवार को सुगड़ी लाया जाएगा।
विज्ञापन
पवन के पार्थिव शरीर के इंतजार में दिनभर लोग रहे। मौसम की खराबी के कारण हेलीकॉप्टर सुबह जम्मू से उड़ नहीं पाया। मौसम ठीक होने के बाद अपरान्ह करीब चार बजे पार्थिव शरीर बरेली पहुंचा। पिथौरागढ़ सैन्य मुख्यालय में सैन्य टुकड़ी शव का इंतजार करती रही।
विज्ञापन
शाम को करीब पांच बजे मौसम खराबी के कारण हेलीकॉप्टर के न आ पाने की सूचना मिली। बताया गया कि बृहस्पतिवार सुबह 9 बजे शहीद का पार्थिव शरीर पिथौरागढ़ पहुंचेगा। पिथौरागढ़ से सड़क मार्ग से शहीद का पार्थिव शरीर सुगड़ी ले जाया जाएगा।
मंगलवार देर शाम जैसे ही पवन के शहीद होने की सूचना मिली, घर में कोहराम मच गया। बुधवार को आसपास के लोग परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंच गए। जैसे ही कोई परिजन शहीद के घर पहुंचता, शहीद की मां देवकी देवी, पिता दान सिंह और भाई धीरज, अविवाहित बहन वंदना उनसे लिपट जाते और दहाड़ मारकर रो पड़ते।
किसी तरह लोगों ने परिजनों को संभाला। शहीद के पिता, भाई बार-बार यही कहते कि खेलने, कूदने की उम्र में पवन संसार से चला गया। उसके बगैर वह लोग कैसे रह पाएंगे।
शहीद पवन सुगड़ा के बड़े भाई उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत धीरज सुगड़ा का कहना था कि सरकार को सैनिकों को अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध कराने चाहिए। उन्होंने पासआउट होने के मात्र तीन महीने बाद नियंत्रण रेखा पर तैनाती पर भी सवाल उठाया। कहा कि बार्डर पर अनुभवी जवानों की तैनाती होनी चाहिए।
धीरज रोते हुए कह रहे थे कि हमारा भाई तो चला गया, अन्य के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए।। शहीद के पिता पूर्व सैनिक दान सिंह कह रहे थे कि सरकार पाकिस्तान को करारा सबक सिखाए तभी उनके दिल की आग ठंडी पड़ेगी।