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आईएफएस को दी जा रही आधी-अधूरी ट्रेनिंग
आफताब अजमत / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 22 Apr 2014 01:37 PM IST
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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (आईएफएस) के अफसरों को आधी-अधूरी ट्रेनिंग दी जा रही है।
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डेपुटेशन पर आए अफसर दे रहे प्रशिक्षण
किसी विशेषज्ञ से प्रशिक्षण दिलवाने के बजाए डेपुटेशन पर आए आईएफएस अफसर ही भविष्य के अधिकारियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
जाहिर है कि अधकचरी जानकारी हासिल करके अधिकारी बनने वाले अफसर भविष्य में कई मौकों पर पूरी कुशलता से कार्य नहीं कर पाएंगे।
इंडियन काउंसिल फॉर फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजूकेशन (आईसीएफआरई) परिसर में मौजूद एक और संस्थान सवालों के घेरे में है। आईजीएनएफए में डेपुटेशन पर आए आईएफएस अफसर ही प्रोफेसर का काम कर रहे हैं।
जबकि जंगलात से जुड़े गंभीर विषयों की ट्रेनिंग के लिए विशेषज्ञों की नियुक्ति होनी चाहिए।
वर्ष 1986 में तत्कालीन सचिव टीएन शेषन की संस्तुति पर केंद्र ने स्थायी फैकल्टी का गजट नोटिफिकेशन जारी किया था, लेकिन विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं की गई।
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स्थायी नियुक्तियां की जाएंगी
वर्ष 1986 में केंद्रीय वन मंत्रालय के सचिव टीएन शेषन ने इंडियन फॉरेस्ट कॉलेज देहरादून का नाम परिवर्तित कर नेशनल फॉरेस्ट एकेडमी आफ इंडिया करने की संस्तुति की थी।
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उन्होंने यह भी कहा था कि संस्थान में चुनिंदा डेपुटेशन वाले आईएफएस को छोड़कर बाकी पदों पर स्थायी नियुक्तियां की जाएंगी।
मसलन, अगर मृदा संरक्षण की जानकारी प्रशिक्षित आईएफएस को देनी है तो इसके लिए मृदा संरक्षण विशेषज्ञ की स्थायी नियुक्ति पर रहेगा। शेषन की संस्तुति पर केंद्र ने इन आदेशों का गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया था।
अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया है कि यहां केवल डेपुटेशन पर आए 20 आईएफएस ही विशेषज्ञों की भूमिका निभा रहे हैं।
इसलिए चाहिए विशेषज्ञ
टीएन शेषन ने संस्तुति इसलिए की थी, क्योंकि आईएफएस को ट्रेनिंग के दौरान न केवल फॉरेस्ट्री की जानकारी दी जाती है।
बल्कि उन्हें मृदा संरक्षण, वनस्पति विज्ञान, फॉरेस्ट्री, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, इकोलॉजी और वन उत्पादकता का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। यह प्रशिक्षण केवल वही दे सकते हैं, जिन्होंने इस क्षेत्र में रिसर्च किया हुआ हो।
जबकि एक आईएफएस केवल ट्रेनिंग लेने के बाद पासआउट होता है। वह विशेषज्ञ की भूमिका नहीं निभा सकता है। जाहिर है कि यदि आईएफएस ही ट्रेनिंग देगा तो जिसे वह प्रशिक्षण देगा उसकी जानकारी आधी अधूरी होती है।
ऐसे में भविष्य में उन्हें कार्य करने में दिक्कतें पेश आती हैं।
एसएफएस भी नहीं हुआ शिफ्ट
देश में इस वक्त स्टेट फॉरेस्ट सर्विस कालेज (एसएफएस) कोयंबटूर, देहरादून और बुर्निहाट में संचालित हो रहे हैं।
वर्ष 1986 में ही देहरादून स्थित एसएफएस कालेज को जबलपुर, मध्य प्रदेश में शिफ्ट करने का ऑर्डर जारी हो गया था, लेकिन आज तक इस पर अमल नहीं हो पाया है।
एसएफएस कालेजों से देशभर के लिए अस्सिटेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट(एसीएफ) का प्रशिक्षण होता है। देहरादून स्थित एसएफएस में भी इस वक्त सात डेपुटेशन वाले आईएफएस कार्यरत हैं, जोकि नियमानुसार गलत है।
आईएफएस की कार्यप्रणाली
आईजीएनएफए में फॉरेस्ट और वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट, मृदा संरक्षण, सर्वेक्षण, एसटी और वैपन चलाने की ट्रेनिंग प्राप्त करने वाले इंडियन फॉरेस्ट सर्विस अधिकारियों के पास अपने वन प्रभाग में फॉरेस्ट और वाइल्ड लाइफ रिसोर्सेज की प्रशासनिक जिम्मेदारी निभानी होती है।
आईएफएस के लिए अनिवार्य योग्यता केवल ग्रेजुएशन है। वह एक काबिल वन प्रशासनिक अधिकारी हो सकता है लेकिन बिना रिसर्च किए विशेषज्ञ फैकल्टी नहीं बन सकता।