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'वर्ल्ड के टॉप 200 कॉलेज में नहीं इंडिया'
अमर उजाला, आफताब अजमत, देहरादून
Updated Mon, 26 Aug 2013 09:17 PM IST
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यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज के दीक्षांत समारोह में पहुंचे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण में देश के शिक्षा संस्थानों के पिछड़ेपन की चिंता साफ नजर आई।
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राष्ट्रपति ने शिक्षा संस्थानों का आहवान किया कि देश के विकास के लिए वह ऐसे छात्र तैयार करें, जो कि नोबल पुरस्कार जीतने के काबिल हों।
शिक्षण संस्थान शामिल नहीं
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस बात पर चिन्ता जाहिर की कि विश्व के 200 विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी विवि या शिक्षण संस्थान शामिल नहीं है।
क्या-क्या हुआ इस दौरान..छात्रों ने कैसे मनाई खुशी..तस्वीरों में भी देंखे...
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राष्ट्रपति ने कहा कि देश में 600 से ज्यादा विवि और 33 हजार से ज्यादा कॉलेज हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि इनमें से एक भी विवि या संस्थान इस काबिल नहीं है कि वह दुनिया में अपना नाम चमका सके।
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एक अलग पहचान
उन्होंने तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों का जिक्र करते हुए बताया कि भारत के गौरवपूर्ण इतिहास में यह संस्थान दुनिया में अपनी एक अलग पहचान रखते थे।
वर्ष 1930 में जब पहली बार भारतीय वैज्ञानिक सीवी रमन को नोबल पुरस्कार मिला तो इस दिशा में एक नया मील का पत्थर स्थापित हुआ। लेकिन वक्त बीतने के साथ देश में शिक्षा की गुणवत्ता समाप्त होती चली गई।
कॉलेज बांट रहे डिग्रियां
हालात यह हैं कि आज के विवि या कॉलेजों में छात्रों को केवल डिग्रियां देने पर जोर दिया जाता है, उनमें योग्यता बढ़ाने पर नहीं।
उन्होंने एक सर्वेक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की तीन कंपनियां दुनिया के शीर्ष 300 कंपनियों में स्थान बनाती हैं लेकिन यदि युवाओं की दक्षता बढ़ाई जाएगी तो भविष्य में निश्चित तौर पर बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
2010-20 तक नवाचारी दशक
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बताया कि वर्ष 2010-2020 तक नवाचारी दशक घोषित किया जा चुका है। इसके तहत ‘साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन पॉलिसी’ इसी वर्ष लांच की गई है।
यह पॉलिसी हमारे देश में सूचना और नवाचार की दिशा में एक नई क्रांति साबित होगा। हमारे शोध कार्यों को एक नई दिशा मिलेगी।
व्यवसायिक प्रशिक्षण पर दिया जोर
प्रणब दा ने अपने अभिभाषण में व्यवसायिक प्रशिक्षण पर जोर दिया। उन्होंने एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा कि देश में केवल सात प्रतिशत ही ऐसे कर्मचारी हैं, जिन्होंने व्यवसायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने बेहतर कार्यक्षमता के लिए व्यवसायिक प्रशिक्षण पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता जताई।
पारंपरिक ऊर्जा स्त्रोतों पर निर्भरता कम हो
राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका, चीन और रूस के बाद भारत में ऊर्जा की सबसे ज्यादा खपत है। खपत की इस ऊंची दर के मुकाबले हमारे ऊर्जा संसाधन अपर्याप्त हैं।
यह देखा गया है कि ब्रिटेन, जर्मनी, जापान और अमेरिका के मुकाबले हमारे देश में सकल घरेलू उत्पाद की प्रति इकाई पर ज्यादा ऊर्जा खर्च होती है।
ऊंची दर प्राप्त करना एक चुनौती
ऐसे में बढ़ती हुई आबादी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करते हुए विकास की ऊंची दर प्राप्त करना एक चुनौती है। इसके लिए ज्यादा ऊर्जा का उत्पादन करने और ऊर्जा के किफायती उपयोग के तरीके ढूंढने की जरूरत है।
संस्थानों का समूह
राष्ट्रपति ने कहा कि ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता घटाने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा के स्त्रोत ढूंढना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा प्रणालियों की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए हमारे देश में ऐसे संस्थानों का समूह होना चाहिए, जो ऊर्जा संबंधी जरूरत को पूरा करने के लिए मिलकर काम कर सके।