जब 50 साल बाद IMA लौटे जांबाज, शहीदों को याद कर नम हुईं आंखें
भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में जब शुक्रवार को 50 साल बाद 1967 बैच के अधिकारी पहुंचे तो शहीदों को याद कर जांबाजों की आंखें नम हो गईं।
मौका था 40वें रेगुलर और 24वें तकनीकी एंट्री कोर्स की गोल्डन जुबली रियूनियन का। इस दौरान विभिन्न युद्धों में शहीए हुए अधिकारियों को श्रद्धांजली दी गई। वर्ष 1967 में पास आउट होने वाले इस बैच ने देश सेवा को समर्पित कई जांबाज अधिकारी दिए।
इनमें कैप्टन देवेंद्र अहलावत को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। इसके अलावा दो वीर चक्र, दो शौर्य चक्र और छह सेना मेडल भी बैच के अधिकारियों के नाम हैं। इस बैच ने नौ लेफ्टिनेंट जनरल दिए।
जिनमें एक इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के चीफ , एक वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ , तीन सेना कमांडर, एक उप सेनाध्यक्ष और तीन विभिन्न विभागों के महानिदेशक शामिल हैं। इतना ही नहीं कोर्स के सदस्य जनरल केएस राव दुनिया भर में अपनी नौकाओं में प्रक्षेपण करने वाले पहले भारतीय थे।
अधिकारियों ने सैन्य जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए
मेजर किरण इंद्र कुमार ने माउंट एवरेस्ट पर विजय प्राप्त करने के अपने प्रयास में अपना जीवन गंवा दिया। कर्नल पवन नायर ने अंटार्कटिक में पहला भारतीय बेस द दक्षिण गंगोत्री स्थापित किया।
इसके अलावा कर्नल एसडी उमालकर ने रणजी ट्राफ ी मैचों में क्रिकेट टीम का बतौर कप्तान नेतृत्व किया। आईएमए में आयोजित इस विशेष आयोजन में बैच से जुड़े अधिकारियों और उनके परिवारों के बीच खास उत्साह देखने को मिला। उन्होंने अपने सैन्य जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए। इसके साथ ही साल 1967 में प्रशिक्षण के दारौन के खट्टे मीठे लम्हों को भी याद किया।
आईएमए कमांडेंट ले. जनरल एसके झा ने बैच का स्वागत किया। उन्होंने अकादमी की मौजूदा सुविधाओं, संसाधनों और भविष्य में किए जाने वाले बदलावों की जानकारी दी। आईएमए के कर्नल अतुल मेहरा ने संस्थान में प्रशिक्षण अवधि के दौरान घटित घटनाओं को दिलचस्प स्लाइडों के साथ आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। अंत में 1967 बैच के सोर्ड ऑफ ऑनर प्राप्त और पूर्व सेना कमांडर जनरल केएस जमवाल ने सभी का धन्यवाद किया। इस मौके पर भारी संख्या में बैच के अधिकारी और उनके परिजन मौजूद रहे।