सूफी गायक कैलाश खेर ने पाकिस्तान पर ली चुटकी कहा 'अपने ही जाल में फंसते चले जाएंगे खरदूषण'
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पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ मौजूदा तनावपूर्ण हालात पर कैलाश खेर का कहना है कि जब बात हो देश की, तो परवाह न हो शेष की। हमारे सिर पर ईश्वरीय सत्ता का प्रताप है। लिहाजा कोई ये सोचे कि नापाक हरकतों से हमारे पराक्रम और ऊर्जा को क्षति पहुंचा सकता है, तो यह सागर में पत्थर मारने जैसा है। उन्होंने कहा कि मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है, वही होता है जो मंजूर-ए खुदा होता है। आतंकी गतिविधियों पर कैलाश खेर ने चुटकी लेते हुए कहा कि अपने ही जाल में खरदूषण फंसते चले जाएंगे।
बृहस्पतिवार को तीर्थनगरी पहुंचे कैलाश खेर ने ‘अमर उजाला’ के साथ बातचीत के दौरान कहा कि मां गंगा को गंगेस और योग को योगा कहकर पुकारना प्राचीन परंपरा और गौरव का अपमान है। यह भाषा के साथ खिलवाड़ भी है। किसी को भी मां गंगा का गलत उच्चारण कर अपमान करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने मां गंगा और योग का एक बेहतरीन तालमेल बनाया है। कैलाश खेर इस योग विधा को गंगासन के नाम से संबोधित करते हैं।
'फैशन के कारण लोगों को गंगेस नहीं कहना चाहिए'
उनका कहना है कि होटलों के नाम भी मां गंगा के दृष्टिकोण से रखे जा रहे हैं, इस प्रवृत्ति पर विराम लगना चाहिए। मां गंगा को कोर्ट ने भी जीवित अस्तित्व की संज्ञा दी है। फैशन के कारण लोगों को गंगेस नहीं कहना चाहिए। सूफी गायक ने कहा कि उनका जन्म मेरठ में हुआ लेकिन पालन पोषण ऋषिकेश में हुआ है। गंगा और योग से गहरा जुड़ाव होने और शांति महसूस करने के लिए तीर्थनगरी आते रहते हैं।
कैलाश खेर का मानना है कि धन कमाना और यश हासिल करना एक सीमा तक ही होता है। पैशन के बाद परिवर्तन का दौर आता है। साल में करीब 100 स्टेज शो करते हैं जिनमें से लगभग 40 बिना फीस लिए प्रस्तुति देते हैं। अब वे प्रेरक वक्ता (मोटीवेशनल स्पीकर) की भूमिका में भी हैं। भगवान भोलेनाथ को अपना ईष्ट मानने वाले कैलाश भविष्य में योग गुरु और प्रेरक वक्ता के रूप में जाना पहचाना चेहरे बनेंगे।
गायक कैलाश खेर ने टिहरी महोत्सव में गीतों से बांधा समा
हिंदी फिल्मों के गायक कैलाश खेर की शानदार प्रस्तुतियों के साथ ही तीन दिवसीय टिहरी झील महोत्सव संपन्न हो गया। खेर ने अपने गीतों पर दर्शकों को देर रात तक पंडाल में झूमने पर मजबूर किया। उन्होंने ‘कैसे बताएं, क्यों तुमको चाहें, क्या कभी अंबर से सूर्य बिछुड़ता है, क्या कभी बिन बाती दीपक जलता’ सहित कई प्रस्तुतियां से महोत्सव को चार-चांद लगाए। महोत्सव में उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न मॉडलों ने फैशन शो में रैंप पर जलवा बिखेरा।
बुधवार को आयोजित टिहरी झील महोत्सव की समापन संध्या में गायक कैलाश खेर ने अपने सूफियाना गीतों से दर्शकों के बीच जमकर रोमांच पैदा किया। रात करीब पौने 11 बजे स्टेज पर कैटवॉक करते हुए उन्होंने शिव स्तुति से कार्यक्रम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने गीतों की झड़ी लगा दी। कैलाश ने ‘तौबा-तौबा वे मेरी सूरत-माशा अल्लाह वे तेरी सूरत, गोरी सोई सेज पे-मुख पे डारे केस, तेरे बिना नहीं लगता दिल मेरा डोलना, प्रीत की लत मोहे ऐसी लगी’ सहित कई दिलकश प्रस्तुतियों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया।
पुलवामा आतंकी हमले में शहीद जवानों के लिए दो मिनट का मौन रखा
कई दर्शक तो उनके साथ मंच पर थिरकने लगे। कैलाश खेर ने भी दर्शकों को निराश नहीं लिया। उन्होंने कई फरमाइशी गाने भी गाए। कहा कि उत्तराखंड देवभूमि हैं। यहां के कणकण में भोलेनाथ बसते हैं। खेर के अनुरोध पर महोत्सव में मौजूद दर्शकों ने पुलवामा आतंकी हमले में शहीद जवानों के लिए दो मिनट का मौन रखा।
इससे पूर्व देश के टॉप मॉडलों ने रैंप पर कैटवॉक किया, जिसमें मिस उत्तराखंड रहीं ख्याति शर्मा, एनआरआई मॉडल डा. संजना, कोरियोग्राफर आकांक्षा गुप्ता, राधिका वर्मा ने मॉडलिंग और ड्रेस का प्रदर्शन किया। वहीं पूर्व ब्लॉक प्रमुख बेबी असवाल के नेतृत्व में स्थानीय पुरुषों और महिलाओं ने भी उत्तराखंडी वेशभूषा में रैंप पर जलवा बिखेेरा। इसके साथ ही कई स्थानीय युवाओं ने प्रस्तुतियां दी। विधायक धन सिंह नेगी ने कहा कि झील महोत्सव का उद्देश्य टिहरी को अंतरराष्ट्रीय साहसिक गंतव्य बनाना है।
इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष संजय नेगी, सीडीओ आशीष भटगांई, एसडीएम अजयवीर सिंह, रविंद्र जुंवाठा, मुक्ता मिश्रा, अधिशासी अभियंता जल संस्थान सतीश नौटियाल, हरेंद्र शर्मा, अविनाश भदौरिया, तपन पांडेय, विक्रम कठैत, रविंद्र सेमवाल, सोबत सिंह राणा, एसएस यादव आदि मौजूद थे। संचालन ज्योतिका लाल ने किया।