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कैलाश पर्वत के आसपास पर्यावरण संरक्षण के लिए पांच साल तक काम करेंगे भारत, चीन और नेपाल

Sun, 13 Jan 2019 09:59 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 13 Jan 2019 09:59 AM IST
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india nepal and china work for Environment protection kailash mount area
kailas mount

हिमालय क्षेत्र में कैलाश पर्वत के आसपास के करीब 31 हजार वर्ग किमी क्षेत्र के संरक्षण के लिए भारत,चीन और नेपाल द्वारा अंतरराष्ट्रीय संस्था आईसीमोड के तहत चल रही पवित्र कैलाश भू क्षेत्र संरक्षण एवं विकास पहल परियोजना का पहला चरण समाप्त हो जाने के बाद दूसरे चरण का काम शुरू हो चुका है। दूसरे चरण में यह परियोजना 2022 तक चलेगी। तीनों देशों ने तय किया है कि पहले चरण में पर्यावरण और जल संरक्षण, जैव विविधता और हेरिटेज टूरिज्म आदि से जुड़े जिन कार्यों के अच्छे परिणाम सामने आए हैं, उन पर कैलाश भू क्षेत्र में अगले पांच सालों तक साझा तरीके से कार्य किया जाएगा। 

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बता दें कि भारत, चीन और नेपाल अंतरराष्ट्रीय संस्था (आईसीमोड) के तहत 2013 से हिमालय के कैलाश भू क्षेत्र के संरक्षण के लिए आपसी सहयोग से काम कर रहे हैं। पवित्र कैलाश भू क्षेत्र संरक्षण एवं विकास पहल परियोजना के तहत अब तक तीनों देश कैलाश पर्वत के आसपास अपने-अपने क्षेत्रों में पर्यावरण जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न तरह के अध्ययन और लोगों को आजीविका से जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस परियोजना के लिए तीनों देशों के भू क्षेत्र में कुल 31 हजार वर्ग किमी इलाके को चिन्हित किया गया है। इसमें 14 हजार वर्ग किमी क्षेत्र नेपाल में, 10 हजार वर्ग किमी चीन में और सात हजार वर्ग किमी क्षेत्र भारत में पड़ता है। आईसीमोड परियोजना में भारत की ओर से नोडल एजेंसी जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी कटारमल के निदेशक डॉ.आरएस रावल ने बताया कि पहले चरण में परियोजना का पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद दूसरे चरण का काम नवंबर 2018 से शुरू हो चुका है।    
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भारत और नेपाल में हुई बैठकों में तय की कार्ययोजना  
जीबी पंत संस्थान कोसी कटारमल के निदेशक डॉ.आरएस रावल ने बताया कि बीते दिसंबर में नेपाल के दार्चूला और भारत के धारचूला में दोनों देशों के वैज्ञानिकों की अलग-अलग बैठकें हुईं जिसमें कैलाश भू क्षेत्र में आपसी सहयोग से कार्य करने की योजना बनाई गई है। जिसमें खास तौर पर तय हुआ कि नेपाल के अतिनंपा अभ्यारण्य में लोगों की भागीदारी से किए जा रहे कार्यों को कैलाश भू क्षेत्र के अंतर्गत पिथौरागढ़ जिले के अस्कोट अभ्यारण्य में लागू करने और अस्कोट अभयारण्य में चल रहे कुछ अच्छे कार्यों को नेपाल के अतिनंपा अभयारण्य में लागू किया जाएगा। साथ ही गुलदार आदि वन्य जीवों की खालें और यारसा गंबू सहित तमाम तरह की वनस्पति, जड़ी बूटी आदि के तस्करी रोकने के लिए भी दोनों देश आपस में सहयोग करेंगे। नौले, धारे और जल स्रोतों को रिचार्ज करने के लिए भारतीय क्षेत्र में अच्छा कार्य किया गया है। इसे दूसरे चरण में नेपाल और चीन भी अपने यहां लागू करेंगे।

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