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बंदी की कगार पर इंदिरा अम्मा कैंटीन
महेश्वर प्रसाद सिंह/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 11 Jan 2017 11:48 AM IST
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indira amma canteen
- फोटो : file photo
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आम लोगों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराने के लिए देहरादून में शुरू की गई तीनों इंदिरा अम्मा कैंटीन बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
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इन कैंटीनों को सस्ती दरों पर गेहूं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी जिलापूर्ति कार्यालय की दी गई थी, लेकिन केंद्र सरकार ने राज्य को पिछले साल नवंबर से एपीएल कार्ड धारकों के लिए गेहूं देना बंद कर दिया है। ऐसे में जिलापूर्ति विभाग ने भी इन कैंटीनों को सस्ती दरों पर गेहूं देने से इनकार कर दिया है। साथ ही, इन कैंटीनों को राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी भी छह महीने से नहीं मिल पाई है।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 20 अगस्त 2015 को स्वतंत्रता दिवस पर घंटाघर स्थित एमडीडीए कांप्लेक्स में राजधानी की पहली इंदिरा अम्मा कैंटीन का शुभारंभ किया था। इस कैंटीन को मिले रिस्पांस से उत्साहित सरकार ने ट्रांसपोर्ट नगर और दून अस्पताल में भी इंदिरा अम्मा कैंटीन शुरू की थी। यहां प्रति थाली 20 रुपये की दर से थाली उपलब्ध है।
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कम दाम में अच्छा खाना उपलब्ध होने का ही कारण है कि कैंटीन में पूरे दिन लोगों की लंबी लाइन लगी रहती है। राजधानी में कई और कैंटीन भी स्वीकृत हो चुकी हैं। इनके संचालन की जिम्मेदारी महिला स्वयं समूहों के पास है, लेकिन सस्ता गेहूं और सब्सिडी न मिलने के कारण इन कैंटीनों पर संकट खड़ा हो गया है। स्वयं सहायता समूहों का कहना है कि बाजार से महंगा गेहूं खरीदकर लोगों को सस्ता खाना उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
35 लाख की सब्सिडी बकाया
छह माह से इंदिरा अम्मा कैंटीनों को राज्य सरकार की ओर से सब्सिडी नहीं मिल पाई है। शहर में चल रही तीनों कैंटीनों की करीब 35 लाख रुपये की सब्सिडी राज्य सरकार को देनी है।
50 कुंतल प्रतिमाह गेहूं की जरूरत
घंटाघर स्थित इंदिरा अम्मा कैंटीन में आठ सौ से एक हजार तक लोग रोजाना खाना खाते हैं। धरना-प्रदर्शन या शहर में कोई बड़ा कार्यक्रम होने पर यह संख्या बढ़ जाती है। इस कैंटीन में प्रतिमाह 25 से 30 कुंतल गेहूं की खपत होती है। वहीं, दून अस्पताल और ट्रांसपोर्ट नगर स्थित कैंटीनों में 15 से 20 कुंतल गेहूं की खपत है। यानी तीनों कैंटीनों में प्र्रतिमाह 50 कुंतल से अधिक गेहूं की जरूरत है।
बहुत बुरा हाल हो गया है, बाजार से महंगा गेहूं खरीदना पड़ रहा है। कई माह से सब्सिडी नहीं मिल रही है। गेहूं के लिए जिलापूर्ति अधिकारी से भी बातचीत हुई थी, लेकिन उन्होंने केंद्र सरकार के फैसले का हवाला देते हुए गेहूं देने से मना कर दिया। कैंटीन की महिलाओं ने पूरी मेहनत कर जनता को शुद्ध और स्वादिष्ट खाना परोसा, लेकिन सस्ता गेहूं और सब्सिडी न मिलने के कारण कैंटीन को चलाना अब मुश्किल हो गया है। इस संबंध में राज्य सरकार से बातचीत चल रही है।
- पूजा त्रिवेदी, संचालिका इंदिरा अम्मा कैंटीन घंटाघर
सब्सिडी के पैसों के लिए ट्रेजरी में बिल लगाया गया है। वहां से भुगतान होने पर सब्सिडी का पैसा दे दिया जाएगा। अब गेहूं की व्यवस्था कैंटीन संचालक को खुद करनी पड़ेगी।
- वंशीधर तिवारी, मुख्य विकास अधिकारी