उत्तराखंड: पिथौरागढ़ में 1921 में जगी थी आजादी की अलख, ये थे आंदोलन के सूत्रधार
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स्वाधीनता आंदोलन में चीन और नेपाल से सटे पिथौरागढ़ की करें तो यहां गांधी जी के वर्ष 1921 के असहयोग आंदोलन से स्वाधीनता संग्राम की अलख जगी थी।
पिथौरागढ़ में स्वाधीनता आंदोलन के सूत्रधार हलपाटी के प्रयाग दत्त पंत थे। प्रयाग दत्त पंत का जन्म वर्ष 1898 में ग्राम हलपाटी (चंडाक) के दुर्गा दत्त पंत और माता भागीरथी देवी के घर में हुआ। प्रयाग दत्त इलाहाबाद में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही स्वाधीनता आंदोलन से प्रभावित हो गए थे।
स्नातक की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर वह असहयोग आंदोलन में कूद पड़े। पंडित मोती लाल नेहरू, पंडित गोविंद बल्लभ पंत के काफी निकट रहे प्रयाग दत्त पंत कुमाऊं में स्वतंत्रता की अलख जगाने के लिए इलाहाबाद से पिथौरागढ़ आ गए। यहां आकर ग्राम हुड़ेती में कांग्रेस कार्यालय की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कांग्रेस कार्यालय का कार्य संभालने के साथ ही आपने स्वतंत्रता आंदोलन का सफलतापूर्वक संचालन किया।
कुली बेगार, कुली उतार आदि आंदोलनों में सक्रिय भूमिका के साथ ही उन्होंने धरमघर, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, लोहाघाट, चंपावत, धारचूला आदि स्थानों पर स्वाधीनता आंदोलन की अलख जगाई। सितंबर 1932 में पंत अल्मोड़ा से पार्टी के कार्य और शिक्षा के उत्थान के लिए धन लेकर पिथौरागढ़ आ रहे थे तो सरयू नदी पार करते समय लगान संबंधी विवाद पर एक अंग्रेजी कारिंदे ने उनके सिर पर लाठी से प्रहार कर दिया। धन की पोटली सरयू नदी में बह गई। बताया जाता है कि उसके बाद प्रयाग दत्त पंत ने मानसिक संतुलन खो दिया। वर्ष 1940 में मात्र 42 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।
ये लोग थे स्वाधीनता आंदोलन के स्तंभ
सोर में आंदोलन के स्तंभ थे स्वर्गीय पंत
स्वाधीनता सेनानियों पर पुस्तक लिख चुके राजेश मोहन उप्रेती कहते हैं कि जिस तरह कूर्मांचल केशरी बद्री दत्त पांडे, हरगोविंद पंत, मोहन जोशी कुमाऊं में स्वाधीनता आंदोलन के जागृति स्तंभ माने जाते हैं, उसी प्रकार प्रयाग दत्त पंत परगना सोर (पिथौरागढ़) के स्वाधीनता आंदोलन के स्तंभ माने जाते हैं।
इनका भी अहम योगदान
हुड़ेती (पिथौरागढ़) के कृष्णानंद उप्रेती, मुनस्यारी के शहीद सेनानी त्रिलोक सिंह पांगती, चिटगल के ईश्वरी दत्त पंत, कमतोली के उदयराम भट्ट, बनकोट के उमेद सिंह बनकोटी, पिथौरागढ़ के गंगा दत्त शर्मा, दरकोट मुनस्यारी के कैलाशानंद उर्फ कुंदन सिंह, गंगोलीहाट के दुर्गा सिंह रावत, शेर सिंह, जवाहर सिंह खाती, गोपाल दत्त पाठक, चंचल सिंह रावल, डीडीहाट के देव सिंह डसीला, दिगरा मुवानी के जवाहर सिंह मारकुना समेत पिथौरागढ़ के 205 स्वाधीनता सेनानियों ने आजादी की जंग में अंग्रेजों ने दांत खट्टे किए थे।