{"_id":"662687a83815113fd55d7d0ad5e68c31","slug":"imposed-on-the-state-respect-in-one-and-a-half-bucks","type":"story","status":"publish","title_hn":"डेढ़ रुपये में स्टेट की इज्जत पर लगाया 'दांव'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डेढ़ रुपये में स्टेट की इज्जत पर लगाया 'दांव'
अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Thu, 12 Sep 2013 08:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजली विभाग अपने पैसे बचाने के चक्कर में उत्तराखंड की साख डुबोने में लगा है। विभाग चाहे तो बाहरी राज्यों से बिजली खरीदकर 24 घंटे आपूर्ति सुचारु रख सकता है लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है।
विज्ञापन
पैसे बचाने के कारण बिजली खरीदने की जगह रोजाना कटौती की जा रही है। इसका सबसे बुरा असर सिडकुल औद्यागिक क्षेत्र पर पड़ा है।
बिजली की सबसे अधिक परेशानी
यही हाल रहा तो उद्योगों का राज्य से मोहभंग हो सकता है और इसका खामियाजा वहां काम करने वाले युवाओं पर पडे़गा।
बड़े उद्योग ही नहीं रोज की कटौती से बिजली आधारित लघु उद्योग और छोटे दुकानदार भी चौपट हो रहे हैं। जनता की परेशानी अलग है। ऊर्जा प्रदेश में बिजली की सबसे अधिक परेशानी ठीक गर्मियों या जाड़ों में ही होती है।
विज्ञापन
उत्पादन प्रभावित
गर्मियों में ग्लेशियर पिघलते हैं इससे नदियां उफान पर आती हैं और जल विद्युत परियोजनाओं में सिल्ट आ जाता है। इससे उत्पादन प्रभावित होता है जबकि जाड़ों में नदियों का जलस्तर कम होने के कारण विद्युत उत्पादन घटता है।
विज्ञापन
पढें, मंदी से औंधे मुंह गिरा कारोबार
यही समय होता है जब हमें बाहरी राज्यों से बिजली खरीदनी पड़ती है। लेकिन बिजली विभाग बिजली खरीदने से बचता है। क्योंकि बाहरी राज्यों से खरीदी गई बिजली की कीमत अधिक है।
डेढ़ रुपये प्रति यूनिट
विभागीय सूत्र बताते हैं कि अपने राज्य में बनने वाली बिजली करीब डेढ़ रुपये प्रति यूनिट में मिलती है जबकि बाहरी राज्यों से खरीदने पर इसकी कीमत ढाई से तीन रुपये प्रति यूनिट तक हो जाती है।
इस वजह से बिजली नहीं खरीदी जाती है। इसकी भरपाई विभाग कटौती करके करता है। इसका सबसे बुरा असर उद्योगों पर पड़ रहा है।
करोड़ों का नुकसान
पिछले दो महीनों में ही कटौती की वजह से सिडकुल में लगे उद्योगों को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा था। इसके अलावा रोज कटौती के कारण फोटो स्टेट, चक्की, इलेक्ट्रानिक्स आदि बिजली आधारित काम धंधों में भी करोड़ों के नुकसान का अनुमान लगाया जा सकता है।