सिटी बस ड्राइवर का बेटा बना सेना में अफसर
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असम (सिलिगुड़ी) के कैडेट प्रसन्नजीत दत्ता के लिए पासिंग आउट परेड बेहद भावुक रही। उनके लिए चैटवुड ड्रिल स्क्वायर पर टेक्निकल एंट्री स्कीम में टॉप करने पर मिले सिल्वर मेडल से बड़ी खुशी पिता का सपना पूरा करने की थी।
पिता सुनील कुमार सिटी बस सर्विस में ड्राइवर हैं, जिन्हें प्रसन्नजीत सैन्य अफसर बनने के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा मानते हैं। पिता खुद सेना में भर्ती होना चाहते थे, लेकिन सपने पूरे न हो सके तो सोचा कि बेटा उनमें रंग भरेगा। प्रसन्नजीत न केवल उनकी उम्मीदों पर खरे उतरे बल्कि 665 कैडेट्स के बीच सिल्वर मेडल भी हासिल किया।
सोमनाथ स्टेडियम में पिपिंग सेरेमनी (कैडेट के कंधों पर परिजनों द्वारा लेफ्टिनेंट रैंक लगाना) के दौरान पिता के हाथों स्टार लगाना परिवार के लिए सबसे सुखद पल था। प्रसन्नजीत ने बताया कि एक सैन्य अफसर बनने के बाद भावनाओं को नियंत्रित करना उनके लिए आसान नहीं है।
कहा कि समृद्ध परिवार से न होने के बावजूद उनके पिता ने उनकी पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। वह पढ़ने में अच्छे थे इसलिए जमा दो में अच्छे अंक आने पर उन्होंने डायरेक्ट एंट्री स्कीम में आवेदन कर दिया।
पुणे से सेना के इंजीनियरिंग संस्थान से ग्रेजुएट होने के बाद वह आईएमए पहुंचे। उनके पिता सुनील कुमार का कहना है कि मुझे प्रसन्नजीत से जो आशा रही है, वह हमेशा उससे एक कदम आगे ही रहा है।
निजी कंपनियों से बेहतर है सेना
हिमाचल प्रदेश के अभिषेक कटोच टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की मेरिट लिस्ट के टॉपर रहे हैं। इंजीनियरिंग के बाद कार्पोरेट सेक्टर में जाने की कतार से हटकर उन्होंने सेना को अपनी पसंद बनाया।
सिल्वर मेडल से सम्मानित अभिषेक का कहना है कि भले ही निजी कंपनियां बड़े सैलरी पैकेज देती हैं, लेकिन अब सेना में बेहतर वेतन के साथ सहूलियतें बढ़ी हैं। ऐसे में प्रोफेशनल कोर्स कर सेना में आने वाले युवाओं के नौकरी करने के पैमाने में सेना फिट बैठ रही है।
सैनिक स्कूल से पढ़े अभिषेक ने बताया कि यहां पर सबको बराबर अवसर मिलते हैं, जो बेहतर करे उसके लिए संभावनाओं की कमी नहीं है। अभिषेक ने कहा कि सैन्य अफसर बनने की पहली सीढ़ी पर कोर्स का टॉपर होना अच्छी शुरूआत माना जा सकता है। उनके पिता रणजीत सिंह आईटीआई में प्राध्यापक हैं।
भारतीय सैन्य अकादमी से पासआउट हुए 665 कैडेट्स में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कैडेट भानु प्रताप सिंह स्वार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित हुए। दिल्ली के रहने वाले भानु मानते हैं कि सेना सिर्फ नौकरी नहीं है, यह जीने का तरीका सिखाती है।
सेना में आने का जज्बा उनमें स्कूल के दौरान पैदा हुआ। जमा दो के बाद इंजीनियर डॉक्टर बनने के बजाए सैन्य अफसर बनने के फैसले को परिवार का समर्थन भी मिला। सर्वश्रेष्ठ कैडेट रहने पर भानु ने बताया कि वह हमेशा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने की कोशिश करते हैं जिसके लिए वह काफी मेहनत भी करते हैं।
भानु के पिता राम अवतार कानून मंत्रालय में सेवारत हैं। उन्होंने कहा कि बेटे को स्वार्ड ऑफ ऑनर का सम्मान मिलना परिवार के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि वह मूलत राजस्थान के रहने वाले हैं, जहां सेना में जाना एक पंरपरा है।
परिवार है सबसे बड़ी प्रेरणा
ओवरऑल मेरिट में दूसरे स्थान पर रहे फरीदाबाद के पंकज कुमार मानते हैं कि परिवार से बड़ी कोई प्रेरणा नहीं है। पंकज कहते हैं कि उनके पिता और बहन उनकी प्रेरणा रहे हैं। पंकज के पिता सुरेंद्र सिंह आर्मी से रिटायर हवलदार हैं जो अब दिल्ली पुलिस में दोबारा सेवारत हैं।
पिता चाहते थे कि बेटा सेना में अफसर बने। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत भी की। बड़ी बहन सेना में कैप्टन है, जिसने पंकज को उनका लक्ष्य हासिल करने में सर्वाधिक प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि हमने बचपन में सेना का लाइफस्टाइल देखा था, जिससे काफी कुछ सीखने को मिला।
सिल्वर मेडल जीतने पर उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश बेहतर सैनिक बनने की है, सम्मान उनकी इसी कोशिश को मिला है।
भारत से गहरा रिश्ता : जनरल करिमी
भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में शनिवार को पासिंग आउट परेड (पीओपी) के निरीक्षण अधिकारी अफगानिस्तान सेना प्रमुख जनरल शेर मोहम्मद करिमी ने कहा कि भारत के साथ उनका गहरा लगाव है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ सामरिक संबंध हैं, जिसके तहत हमारे युवा यहां कि सैन्य अकादमियों में प्रशिक्षण ले रहे हैं। अफगानिस्तान में चल रहे पुनर्निर्माण के लिए भारत का सहयोग मिल रहा है।
जनरल करिमी ने कहा कि भारतीय सेना का समृद्ध इतिहास है और वह खुद यहां कई महत्वपूर्ण सैन्य प्रशिक्षण ले चुके हैं। आतंकवादी से निपटने से लेकर इंटेलिजेंस कोर्स उन्होंने भारत से किया है। नेशनल डिफेंस अकादमी में प्रशिक्षण ले चुके जनरल करिमी ने कहा कि यहां सैन्य प्रशिक्षण का उच्च स्तर है।
दोनों देशों के सामरिक संबंधों के चलते अफगानिस्तान में कई महत्वपूर्ण कार्य भारत सरकार करा रही है। हालांकि अफगानिस्तान में आतंकवाद के हालात पर वह कुछ नहीं बोले। पासिंग आउट परेड के बाद सोमनाथ स्टेडियम में जनरल करिमी ने उत्तराखंड के रिटायर सैन्य अफसरों से मुलाकात की।
भारत में लगता है दिल : अनवारी
सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट से सम्मानिक अफगानिस्तान के मोहम्मद खालिद अनवारी ने बताया कि उनको भारत बेहद पसंद है। यहां पर लोग अनुशासित होने के साथ बेहद मधुर हैं। अकादमी में ट्रेनिंग को वह जिंदगी का सबसे बेहतर अनुभव मानते हैं।
उन्होंने कहा कि अकादमी में ट्रेनिंग के साथ जो भारतीय दोस्त मिले वह ताउम्र उनके संपर्क में रहेंगे। खाने के शौकीन अनवारी ने बताया कि भारतीय खाना बेहद स्वादिष्ट है।
अफगानिस्तान में हालात पर अनवारी ने कहा कि वहां अब पहले जैसी स्थिति नहीं है। वहां सेना लगातार मजबूत हो रही है और उन्हें गर्व है कि वह भारत से लौटकर उस अफगान सेना का हिस्सा बनेंगे।
गोल्ड मेडलिस्ट पवन ने रचा इतिहास
आईएमए से पासआउट हरियाणा (झज्जर) के पवन सांगवान भले ही स्वार्ड ऑफ आनर लेने से एक कदम दूर रह गए, लेकिन उन्होंने अकादमी के इतिहास में ऐसी मिसाल कायम कि जो विरले ही कर पाते हैं। एयरफोर्स में एयरमैन से अपना सैन्य सफर शुरू करने वाले पवन न केवल अफसर बने बल्कि वह 601 कैडेट्स की मेरिट लिस्ट में टॉपर रहे।
गोल्ड मेडल से सम्मानित पवन की लगन और कड़ी मेहनत युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है। एनडीए के ट्रेंड कैडेट्स को मात देकर उन्होंने वह मुकाम हासिल किया जहां कुछ ही पहुंच पाते हैं।
नान मेडिकल में जमा दो (इंटरमीडिएट) करने के बाद पवन आत्मनिर्भर बनने के लिए एयरफोर्स में भर्ती हुए। पिता धर्मवीर सिंह पशु चिकित्सक हैं। परिवार की तरफ से उनपर नौकरी का दबाव नहीं था। 2006 में एयरमैन बने पवन को एनडीए की परीक्षा पास करने का मलाल था, फिर भी अफसर बनने की चाहत कम नहीं हुई।
ग्रामीण पृष्ठभूमि होने के चलते एक झिझक उनके अंदर जरूर थी। एयरमैन बनने के बाद उन्होंने सेना को करीब से जाना तो अफसर बनने के ख्वाब को पूरा करने में जुट गए। 2010 में वह एयरमैन से आर्मी कैडेट कालेज के लिए चयनित हुए। 2013 में जब पवन आईएमए पहुंचे तो उन्हें एनडीए (नेशनल डिफेंस कॉलेज) से पासआउट कैडेट्स से कड़ी चुनौती मिली।
उन्होंने सबको पीछे छोड़ते हुए मेरिट लिस्ट में अव्वल स्थान हासिल किया। अफगानिस्तान सेना प्रमुख जनरल शेर मोहम्मद करिमी ने पवन को गोल्ड मेडल प्रदान किया।