IMA फर्जीवाड़ाः मामला इतना सीधा नहीं है
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भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में ग्रुप सी की भर्तियों में जिस तरह जाली दस्तावेजों से नियुक्तियां मिली हैं उससे फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह के तार तलाशे जा रहे हैं।
सैन्य अधिकारी अभी जांच के घेरे में
इस पूरे फर्जीवाड़े में जिस संख्या में नियुक्तियां हुई हैं उससे चयन प्रक्रिया में जुटे आईएमए के सैन्य अधिकारी अभी जांच के घेरे में हैं। लगभग चार माह में सीबीआई ने अपनी जांच में पुख्ता सबूत जुटाने में लगी है, जिसमें उसे बड़ी हद तक कामयाबी भी मिली है। हालांकि अकादमी इस पूरे मामले को फर्जी दस्तावेज से नौकरी हासिल करने का बता रही है।
फर्जी दस्तावेजों वाले मेरिट में
आईएमए में ग्रुप सी की भर्तियों में फर्जी दस्तावेजों से नियुक्ति पाने कर्मचारी इस पूरी जांच की अहम कड़ी माने जा रहे हैं। फर्जी दस्तावेज बना कर चयनित होने वाले अभ्यर्थी आखिर चयन परीक्षा पास कर मेरिट लिस्ट में कैसे पहुंच गए इसका खुलासा होना अभी बाकी है। बर्खास्त होने वाले प्रोबेशन कर्मचारी इस राज से पर्दा उठा सकते हैं कि फर्जी दस्तावेज और मेरिट लिस्ट में कोई संबंध है या नहीं है।
आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भर्ती
फर्जी दस्तावेज पकड़ में आन से बर्खास्त होने वाले प्रोबेशन कर्मचारियों में बड़ी संख्या प्रेमनगर और देहरादून के साथ लगते क्षेत्रों की है। मामले की जांच में जुटी सीबीआई सबसे पहले फर्जीवाड़े की पहली कड़ी यानि उन ठिकानों को तलाश में है जहां दस्तावेज तैयार हुए हैं। कुछ अहम सुराग जांच एजेंसी के के हाथ लगे भी हैं।