फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   illegal slum increased in dehradun.

दस साल में ‘डबल’ हो गई बस्तियां

Fri, 31 Oct 2014 02:00 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 31 Oct 2014 02:00 PM IST
विज्ञापन
illegal slum increased in dehradun.

बस्ती अवैध, लेकिन पानी और बिजली कनेक्शन वैध। इतना ही नहीं इन बस्तियों में सुविधाएं जुटाने के लिए विधायक निधि भी खर्च होती है।

विज्ञापन


शहर में 129 मलिन बस्तियां

देहरादून के दीपनगर ही नहीं शहर की 129 मलिन बस्तियों में यही हाल है। सरकारी महकमों और नेताओं की मेहरबानी का ही असर है कि राजधानी में अवैध बस्तियों का जाल फैलता जा रहा है। वर्ष 1998 से पहले नगर पालिका द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार, बिंदाल और रिस्पना नदी के किनारे 75 मलिन बस्तियां थीं।

2003-04 में नगर निगम की ओर से हुए दूसरे सर्वे में यह आंकड़ा बढ़कर 102 हो गया था। महज, पांच साल में ही दून में 27 और मलिन बस्तियां बस गईं।

उधर, सरकार ने भी इन बस्तियों को नियमित करने की कार्रवाई शुरू कर दी। दून की सभी चिह्नित 129 बस्तियों को फ्री होल्ड करने का शासनादेश जारी हो चुका है।

उधर, नगर निगम इन बस्तियों के पुनर्वास की मांग करता रहा है। मेयर विनोद चमोली बताते हैं कि महज वोट बैंक के लिए शहर की सूरत खराब कर दी गई है।

उन्होंने कहा, बस्तियों के नियमितीकरण पर भाजपा सरकार स्लम पालिसी लेकर आई। लेकिन कांग्रेस सरकार केवल बस्तिवासियों को नियमितीकरण का झुनझुना पकड़ा रही है। ढाई साल में सरकार ने घोषणाओं के अलावा कुछ नहीं किया।
विज्ञापन


यह हो सकता है समाधान

बिदाल और रिस्पना नदी कि चौड़ाई कितनी हो, यह सरकार तय नहीं कर पाई है। इसकी मांग पिछले कई सालों से नगर निगम करता रहा है। नदियों की चौड़ाई तय होने से दो फायदे होंगे। पहला नदी की सीमा में बसे लोगों को आसानी से शिफ्ट किया जा सकेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


दूसरा जो बस्तियां इस सीमा से बाहर होंगी उनका विकास आसानी से हो सकेगा। ऐसे ही प्रयोग के बाद गुजरात में साबरमती नदी को नया जीवन मिल पाया। मेयर विनोद चमोली बताते हैं कि इस बारे में कई बार शासन को पत्र भेजा जा चुका है। एक बार नदी की चौड़ाई तय हो जाए तो किनारों पर बसे लोगों को शिफ्ट करने में आसानी होगी।

अवैध बस्तियों के रक्षक बने खेल मंत्री

खेल मंत्री और धर्मपुर विधायक दिनेश अग्रवाल अवैध बस्तियों के रक्षक के रूप में सामने आ गए हैं। उन्होंने बतौर विधायक नगर निगम को इन बस्तियों में कदम न रखने का आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी अवैध बस्तियों को गिराया गया तो अधिकारी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

उधर, मेयर विनोद चमोली ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि खेल मंत्री को ऐसे निर्देश देने के बजाए बस्तियों के नियमितीकरण पर तेजी दिखाने की सलाह दी है।

ब्रहमपुरी क्षेत्र के लोग गुरुवार को मंत्री दिनेश अग्रवाल से मिले। लोगों ने आरोप लगाया कि अक्सर नगर निगम के कर्मचारी आकर बस्ती उजाड़ने की धमकी देते हैं। कर्मचारी कहते हैं कि लोगों को बीएसयूपी फ्लैटों में जाना होगा। इसके बाद दिनेश अग्रवाल ने मुख्य नगर अधिकरी से फोन पर बात की।

उन्होंने कहा कि ब्रहमपुरी क्षेत्र उनकी विधानसभा सीट में आता है। इसलिए विधायक होने के नाते वे निर्देश दे सकते हैं। उन्होंने कहा, बस्तियों की नियमितीकरण प्रक्रिया पूरी होने तक लोगों पर दबाव न डाला जाए। मुख्य नगर अधिकारी हरक सिंह रावत ने खेल मंत्री की ओर से मिले निर्देश की पुष्टि की है।


नियोजन मंत्री दिनेश अग्रवाल निगम के अधिकारियों को निर्देश देने से पहले अपनी सरकार को बस्तियों का नियमितीकरण करने को कहें। अधिकारी सरकार के ही होते हैं, वह तो अपनी ड्यूटी करेंगे ही।
- विनोद चमोली, मेयर

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed