{"_id":"e932076cd902c8e416cb1bfbc9b5deb5","slug":"illegal-promotion-in-higher-education","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रमोशन चाहिए तो करनी होगी सेंटिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रमोशन चाहिए तो करनी होगी सेंटिंग
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 08 Feb 2014 01:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसी भी नौकरी में तरक्की के लिए काबलियत और अनुभव सबसे ज्यादा जरूरी है, लेकिन उच्च शिक्षा विभाग में कायदे अलग हैं। शिक्षक की पहुंच ऊपर तक है तो सब नियम कायदे बदल जाते हैं।
विज्ञापन
पढ़ें,केदारनाथ के रावल का भी रहा है विवादों से नाता
विज्ञापन
ऐसे ही 64 शिक्षकों पर विभाग की मेहरबानी हैरान करने वाली है। यह शिक्षक तदर्थ से विनियमित हुए तो सीनियर पे स्केल दे दिया गया। इतना ही नहीं इन्हें नौ के बजाए महज छह साल में ही असिस्टेंट से एसोसिएट प्रोफेसर बना दिया गया। प्रदेश में उच्च शिक्षा की बदहाली के लिए विभाग में चल रही यह अंधेरगर्दी भी एक बड़ा कारण है।
विज्ञापन
आरटीआई में खुली पोल
शिक्षक डा. दिनेश प्रताप ने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी तो यह पूरा खेल सामने आया। हालांकि, इस मामले से जुड़े अहम दस्तावेज गायब बताए गए हैं। विभाग ने सरकारी डिग्री कालेजों के 64 शिक्षकों को तीन जुलाई 2003 में 8000-275-10000 स्केल पर तदर्थ से विनियमित किया था।
नियम के खिलाफ हुए प्रमोशन
2001 के शासनादेश के मुताबिक विनियमित होने के चार से छह साल बाद उन्हें सीनियर पे स्केल मिलना चाहिए था लेकिन विभाग ने इसी दिन 10000-325-15200 का स्केल दे दिया। मेहरबानी की बरसात यहीं नहीं थमी।
पढ़ें,हैंडसम दिखने के चक्कर में कहीं बन ना जाएं नपुंसक
शिक्षकों का ग्रेड पे वर्ष 2012 में आठ हजार होना चाहिए था लेकिन वर्ष 2006 में ही कर दिया गया। नियमों के मुताबिक असिस्टेंट से एसोसिएट प्रोफेसर बनने में कम से कम नौ वर्ष का समय लगता है लेकिन इन 64 शिक्षकों को महज छह साल लगे। विभाग के अनुसार इन शिक्षकों की नियुक्ति, प्रमोशन के संबंध में शासन को भेजी गई पत्रावलियां उपलब्ध नहीं हैं।