फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   illegal mining in rivers

नदियों में दो करोड़ का खेल

Fri, 02 Aug 2013 08:53 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Fri, 02 Aug 2013 08:53 AM IST
विज्ञापन
illegal mining in rivers

राजधानी की नदियों पर माफिया राज कायम करने में सरकारी विभागों के कर्मचारियों का भी बड़ा हाथ है। नदियों के रास्तों पर राजस्व, वन और पुलिस की चौकियां और बैरियर बने तो हैं, लेकिन इन पर तैनात कर्मचारी खनन से भरे वाहनों को रोकने की जहमत नहीं उठाते।

विज्ञापन


हां, इन वाहनों को बेरोकटोक निकलने देने की ‘फीस’ जरूर वसूल ली जाती है। सूत्र बताते हैं कि हर नदी में प्रतिदिन लगभग 20 ट्राली और तीन से चार डंपर चलते हैं। हर ट्राली दिनभर में पांच चक्कर रेत, पत्थर निकालती है। बैरियर से ट्रालियां निकालने के लिए तीन सौ और डंपर के लिए 1200 रुपये खनन माफिया चुकाते हैं।
विज्ञापन


इस तरह एक ही नदी से हर दिन 33,600 रुपये कर्मचारी बतौर रिश्वत जुटा लेते हैं। जिले में आठ से दस नदियों में इस तरह का काम हो रहा है यानी हर दिन साढे़ तीन लाख रुपये, हर महीने एक करोड़ अस्सी लाख रुपये और हर साल करीब 24 करोड़ रुपये राजस्व का चूना सरकार को लगाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बारिश में खिल जाती हैं बांछें
बरसात में राजधानी की नदियां भले ही अपने किनारे बसी बस्तियों के  बाशिंदों के लिए खतरे का सबब बन जाती हों, लेकिन अवैध खनन करने वालों की बांछें  नदियों का बढ़ा जलस्तर देख खिल जाती हैं। बारिश में रेत, बजरी और पत्थर की मात्रा सामान्य दिनों की अपेक्षा दोगुनी तक बढ़ जाती है। ऐेसे में माफिया भारी बारिश के बावजूद नदियों में घुसने से गुरेज नहीं करते।

हर ट्राली और डंपर की होती है गिनती
सूत्र बताते हैं कि खनन रोकने के बजाय संबंधित विभागों के कर्मचारी नदियों से निकलने वाली ट्रैक्टर ट्रालियों, ट्रकों की गिनती में जुटे रहते हैं। किस नदी से कितने वाहन रेत, पत्थर और बजरी निकाली गई इसका हर दिन का पूरा हिसाब रखा जाता है। इसके बाद खनन माफिया तय रकम का भुगतान करते हैं। सूत्रों के मुताबिक खनन नगर क्षेत्र से जितना नजदीक होगा, उसका रेट भी उतना ही अधिक लिया जाता है। खनन माफिया नगर में हर ट्राली पत्थर और बजरी के लिए पांच हजार रुपये लेते हैं। इसमें से 1200 रुपये पुलिस, वन, राजस्व विभाग के लिए रखे जाते हैं। वहीं, दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में माफिया को प्रति ट्राली सात से आठ सौ रुपये मिलते हैं। वहां रिश्वत के लिए इसमें से दो से तीन सौ रुपये तय हैं।


इन क्षेत्रों में हो रहा खनन
लच्छीवाला सौंग नदी में, बालावाला और मियांवाला सौंग नदी में, मोथरोवाला, नौंका, नागल, सिमलास व बुल्लावाला सुसवा नदी में, शीतला नदी प्रेमनगर में

ये विभाग हैं जिम्मेदार

राजस्व विभाग, वन विभाग, पुलिस और आरटीओ

एक दूसरे पर डाल देते हैं जिम्मेदारी

खनन को रोकने के बजाय विभागीय अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल देते हैं। हाल ही में खनन से परेशान ग्रामीणों ने राजाजी पार्क के निदेशक का घेराव किया तो उन्होंने संबंधित क्षेत्र पार्क के बजाय देहरादून वन प्रभाग में होना बताया।

खबर पर राय देने के लिए क्लिक करें

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed