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हरिद्वार: अवैध कब्जे के खिलाफ जिलाधिकारी की सख्ती भी बेअसर 

Tue, 26 Dec 2017 03:59 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार Updated Tue, 26 Dec 2017 03:59 PM IST
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Illegal land occupation in haridwar
DEEPAK RAWAT - फोटो : file photo
जिलाधिकारी दीपक रावत की सख्ती भी टिबड़ी में नगर निगम और बीएचईएल की भूमि पर अवैध कब्जा तथा निर्माण करने वालों ने बेअसर कर दी है।
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टिबड़ी वाटर वर्क्स की नगर निगम के स्वामित्व की भूमि पर अवैध कब्जा व निर्माण का सिलसिला राजनीतिक संरक्षण में बदस्तूर जारी है। राजनीतिक दखलंदाजी इस कदर हावी है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम अधिकारी लाखों रुपये मूल्य के एक भूखंड को कब्जे में नहीं ले पाएं हैं।

जिलाधिकारी ने विवादित भभूतावाला बाग की भूमि सहित टिबड़ी की भूमि की संयुक्त रुप से पैमाईश कराकर उप जिलाधिकारी को भेल तथा नगर निगम की भूमि का सीमाकंन कराने का निर्देश दिया था। भूमि की रजिस्ट्री करने वाले व्यक्ति को भी जिलाधिकारी ने अपने मालिकाना हक के अभिलेखों तथा की गई रजिस्ट्रीयों के साथ तलब किया है। बीएचईएल के संपदा विभाग के अधिकारियों को भी अपने संपत्ति अभिलेखों के साथ बुलाया गया था। लेकिन तहसील प्रशासन ने अभी तक टिबड़ी की भूमि की पैमाईश और सीमाकंन नहीं किया है।
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तहसील प्रशासन पहले से ही इस भूमि की पैमाईश करने में पीछा मारता रहा है। पूर्व में नगर निगम अधिकारियों के कई बार के अनुरोध के बाद भी तहसील राजस्व अधिकारियों व लेखपालों ने नगर निगम को कोई रास्ता नहीं दिया है। भेल संपदा विभाग ने भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कोतवाली रानीपुर में नामजद मुकदमा भी दर्ज कराया था। चूंकि कब्जा करने वालों के कई पुलिस वाले भी थे इसलिए उस पर कार्रवाई नहीं की गई है। अब एक बार फिर जिलाधिकारी ने प्रकरण को कुरेदा है तो उम्मीद लगाई जा रही है कई हस्तियां बेपर्दा होंगी। 
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उच्च स्तर पर उठ चुका कब्जों का मामला 
नगर निगम के आवासों, संपत्तियों पर अवैध कब्जों का प्रकरण शासन में उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। लेखापरीक्षा जांच में भी यह प्रकरण उजागर हो चुका है। महालेखाकार कार्यालय ने सचिव शहरी विकास को प्रत्यावेदन भेजा जा चुका है। राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र कोटियाल ने भी सचिव शहरी विकास को नगर निगह हरिद्वार की संपत्तियों, आवासों पर अवैध कब्जों तथा खुर्द-बुर्द किए जाने की शिकायत की जांच कराकर दो महीने के अंदर जांच रिपोर्ट आयोग में प्रस्तुत करने का निर्देश 5 दिसंबर को ही दिया है इसलिए उम्मीद है कि अब नगर निगम अधिकारियों को भी राजनीतिक संरक्षण से हटकर अपनी संपत्तियों की स्थिति का पता लगाने पड़ेगा। 
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