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Dehradun News: मानसिक रूप से हों फिट तो फिर सभी कुछ आपके नियंत्रण में होगा
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अमर उजाला एवं वंडरवेल फाउंडेशन की ओर से दिल्ली पब्लिक स्कूल देहरादून में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने तनाव के कारण और उसे दूर करने उपाय बताए।
कार्यक्रम की शुरूआत में अतिथियों का पौधे भेंटकर कर स्वागत किया गया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन और स्वागत गीत से कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं पेरिफेरल वैस्कुलर सर्जन डॉ. परवीन जिंदल ने कहा कि हम सभी को मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर खुलकर बात करनी चाहिए। डीपीएस के प्रधानाचार्य बीके सिंह ने कहा कि मानसिक और शारीरिक रूप से फिट होंगे तो फिर सब कुछ आपके नियंत्रण में होगा। कार्यक्रम की रिसोर्स पर्सन काउंसलर मनोवैज्ञानिक और वंडरवेल फाउंडेशन की निदेशक डॉ याशना बाहरी सिंह ने कहा कि दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं, जिसे कम या ज्यादा तनाव न हो। कहा कि हम मानसिक समस्या को शर्म की बात मानते हुए इस पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं। कहा कि तनाव महज सोने से खत्म नहीं हो सकता। बताया कि बिना विचारों के किसी एक बिंदु पर फोकस करने से एकाग्रता आती है और तनाव कम होता है। इस मौके पर उपप्रधानाचार्य सुजाता सिंह, नाजिश सलमान आदि मौजूद रही।
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बच्चों ने दिए सवालों के जवाब
- सवालों के जवाब में बच्चों ने बताया कि तनाव से चेहरे से खुशी गायब हो जाती है, सामाजिक जीवन प्रभावित होता है, घबराहट और अवसाद के साथ काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। इस दौरान महज 9 छात्रों ने स्वीकार किया कि वे मनोवैज्ञानिक के पास गए हैं।
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... तो रोने में शर्म कैसी, दिल खोलकर निकालें भड़ास
- कार्यशाला में 5 बच्चों ने हाथ उठाकर माना कि वे परेशान होने पर रोते हैं। मनोवैज्ञानिक डॉ याशना ने रोना कोई बुरी बात नहीं है। किसी के सामने नहीं तो बंद कमरे में रोने से तनाव खत्म हो सकता है, साथ ही दोस्तों के सामने दिल खोलकर, दिल की भड़ास निकालना भी समाधान हो सकता है।
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इन स्कूलों के छात्रों ने हिस्सा लिया
- कासिगा, साई ग्रेस एकेडमी, सुभाष चंद्र बोस एकेडमी, देहरादून हिल्स एकेडमी, एन मैरी, सेलाकुई इंटरनेशनल स्कूल, बेवर्ली हिल्स शालिनी स्कूल और केवी-2 सर्वे स्कूल।
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नुक्कड़ नाटक और पोस्टर मेकिंग ने जीता दिल
- कार्यक्रम में बच्चों ने पढ़ाई को लेकर समाज के दबाव और तनाव पर मार्मिक अभिनय प्रस्तुत कर दिल जीता तो वहीं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में रचनात्मकता का परिचय देते हुए मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित चित्र बनाए।
कार्यक्रम की शुरूआत में अतिथियों का पौधे भेंटकर कर स्वागत किया गया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन और स्वागत गीत से कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं पेरिफेरल वैस्कुलर सर्जन डॉ. परवीन जिंदल ने कहा कि हम सभी को मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर खुलकर बात करनी चाहिए। डीपीएस के प्रधानाचार्य बीके सिंह ने कहा कि मानसिक और शारीरिक रूप से फिट होंगे तो फिर सब कुछ आपके नियंत्रण में होगा। कार्यक्रम की रिसोर्स पर्सन काउंसलर मनोवैज्ञानिक और वंडरवेल फाउंडेशन की निदेशक डॉ याशना बाहरी सिंह ने कहा कि दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं, जिसे कम या ज्यादा तनाव न हो। कहा कि हम मानसिक समस्या को शर्म की बात मानते हुए इस पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं। कहा कि तनाव महज सोने से खत्म नहीं हो सकता। बताया कि बिना विचारों के किसी एक बिंदु पर फोकस करने से एकाग्रता आती है और तनाव कम होता है। इस मौके पर उपप्रधानाचार्य सुजाता सिंह, नाजिश सलमान आदि मौजूद रही।
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बच्चों ने दिए सवालों के जवाब
- सवालों के जवाब में बच्चों ने बताया कि तनाव से चेहरे से खुशी गायब हो जाती है, सामाजिक जीवन प्रभावित होता है, घबराहट और अवसाद के साथ काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। इस दौरान महज 9 छात्रों ने स्वीकार किया कि वे मनोवैज्ञानिक के पास गए हैं।
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... तो रोने में शर्म कैसी, दिल खोलकर निकालें भड़ास
- कार्यशाला में 5 बच्चों ने हाथ उठाकर माना कि वे परेशान होने पर रोते हैं। मनोवैज्ञानिक डॉ याशना ने रोना कोई बुरी बात नहीं है। किसी के सामने नहीं तो बंद कमरे में रोने से तनाव खत्म हो सकता है, साथ ही दोस्तों के सामने दिल खोलकर, दिल की भड़ास निकालना भी समाधान हो सकता है।
इन स्कूलों के छात्रों ने हिस्सा लिया
- कासिगा, साई ग्रेस एकेडमी, सुभाष चंद्र बोस एकेडमी, देहरादून हिल्स एकेडमी, एन मैरी, सेलाकुई इंटरनेशनल स्कूल, बेवर्ली हिल्स शालिनी स्कूल और केवी-2 सर्वे स्कूल।
नुक्कड़ नाटक और पोस्टर मेकिंग ने जीता दिल
- कार्यक्रम में बच्चों ने पढ़ाई को लेकर समाज के दबाव और तनाव पर मार्मिक अभिनय प्रस्तुत कर दिल जीता तो वहीं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में रचनात्मकता का परिचय देते हुए मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित चित्र बनाए।