नाबालिग को दी गाड़ी तो खानी पड़ेगी जेल की हवा
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उत्तर प्रदेश में यह संशोधन लागू होने के बाद उत्तराखंड में इसके अनुपालन की तैयारी है। नियम को कठोर बनाने से सड़क हादसों में नाबालिगों की मौत के मामलों में गिरावट आ सकती है।
देश भर में बच्चों के दोपहिया और चौपहिया वाहन चलाने से सड़क हादसों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। यही कारण है कि मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव की मांग उठ रही थी। अन्य राज्यों की तरह उत्तराखंड भी उससे अछूता नहीं है। खासतौर से देहरादून में वाहन चलाने की वजह से इस साल कई नाबालिगों को जान से हाथ धोना पड़ा। हाल ही में केंद्र सरकार ने मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन कर व्यवस्था की है कि नाबालिग बच्चों को वाहन देने वाले अभिभावक अब सजा के हकदार होंगे।
बच्चों को गाड़ी देने वाले वाहन मालिक होंगे गिरफ्तार
बच्चों को वाहन देने पर उसके मालिक की गिरफ्तारी की जाएगी। इसमें तीन माह की कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। उत्तर प्रदेश में शनिवार को परिवहन आयुक्त ने यह संशोधन लागू कराते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे। देहरादून के एसएसपी डॉ. सदानंद दाते का कहना है कि व्हीकल एक्ट में संशोधन बेहद कारगर साबित होगा, क्योंकि इसमें अभिभावकों की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
केंद्र सरकार द्वारा मोटर व्हीकल एक्ट में किया गया संशोधन स्वत: ही प्रदेश में लागू हो जाएगा। सिविल और यातायात पुलिस से उसका सख्ती से अनुपालन कराया जाएगा। निसंदेह इससे नाबालिगों के साथ होने वाले हादसों में कमी आएगी।
-एमए गणपति, पुलिस महानिदेशक।
परवान नहीं चढ़ सका अभियान
पुलिस ने बच्चों के वाहन चलाने पर रोक लगाने के लिए कई बार अभियान भी चलाया, लेकिन वह परवान नहीं चढ़ सका। बच्चों के पकड़े जाने पर अभिभावकों को बुलाकर नसीहत दी गई। स्कूल संचालकों पर भी दबाव बनाया गया, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। एसपी ट्रैफिक धीरेन्द्र गुंज्याल ने बताया कि पुलिस स्तर से कार्रवाई में किसी तरह की कमी नहीं है।
1 जनवरी से 31 जुलाई तक हुई कार्रवाई
विवरण------------- चालान------- सीज
यातायात पुलिस------- 77------- 14
सिटी पेट्रोल यूनिट------- 362------- 154
कुल योग------- 439------- 168