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दून अस्पताल में आईसीयू का हाल बेहाल
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 06 Aug 2014 11:03 AM IST
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दून अस्पताल के आईसीयू में सिर्फ चार बेड हैं। यहां हर रोज दो हजार से अधिक मरीज विभिन्न बीमारियों के इलाज को आते हैं।
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जनरल वार्ड में रहने को मजबूर मरीज
औसतन 20 मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें आईसीयू में भर्ती करने की जरूरत रहती है। खासकर सिर की चोट और आपरेशन वाले गंभीर मरीजों को आईसीयू में भर्ती करने की सलाह दी जाती है।
लेकिन आईसीयू की क्षमता महज चार बेड की होने की वजह से कई मरीजों को जनरल वार्ड में रहने को मजबूर होना पड़ता है।
सिर की गंभीर चोट वाले मरीजों को तो आईसीयू खाली न होने पर प्राइवेट अस्पताल रेफर करना मजबूरी रहती है। इससे खासतौर से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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अहमद को ले जाना पड़ा निजी अस्पताल
30 जुलाई को सड़क दुर्घटना में घायल शिमला बाईपास के अहमद को दून अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचाया गया।
डॉक्टरों ने सिर में गहरी चोट होने पर आईसीयू में भर्ती करने की बात कही। लेकिन आईसीयू फुल होने पर काफी देर इंतजार कर अहमद को निजी अस्पताल ले जाना पड़ा।
एक अगस्त को संगीता का पौड़ी के एक अस्पताल में आपरेशन हुआ। हालत बिगड़ने पर संगीता को परिजन दून अस्पताल लाए।
यहां डॉक्टरों ने आईसीयू में मरीजों से फुल होने की बात कहकर जनरल वार्ड में शिफ्ट करने को कहा। मजबूरन मरीज को एक ट्रस्ट के अस्पताल ले जाया गया।
रोजाना औसतन 15 आपरेशन होते हैं। इनमें से कई मरीजों को आईसीयू में भर्ती करने की जरूरत होती है। सिर की चोट वाले गंभीर मरीजों को भी आईसीयू में भर्ती करना पड़ता है। सीमित बेड होने की वजह से दिक्कत होती है। इस बारे में महानिदेशालय को सूचित कराया जा चुका है।
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- डॉ. आरएस असवाल, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (दून अस्पताल)