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प्रेमलाल के जेंडर की गुत्थी सुलझी: 70 के दशक की निकलीं IAS, तलाशा जा रहा पीलीभीत कनेक्शन, पढ़ें पूरा मामला

Sun, 09 Jul 2023 03:55 PM IST
रेनू सकलानी अश्वनी त्रिपाठी, माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
अश्वनी त्रिपाठी, माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sun, 09 Jul 2023 03:55 PM IST
सार

आखिरकार राजस्व विभाग ने सुश्री प्रेमलाल के जेंडर की गुत्था सुलझा ली। देहरादून के जमींदार राजा चंद्र बहादुर सिंह के पास बेहिसाब जमीन थी। जमींदारी एक्ट लागू हुआ तो अतिरिक्त जमीनों पर सरकार ने कब्जा लेना शुरू कर दिया। ऐसे में चंद्र बहादुर ने वर्ष 1972 में अपनी अतिरिक्त जमीन में से 60 बीघा का एक टुकड़ा मौसेरी बहन आईएएस अफसर सुश्री प्रेमलाल को दान में दे दी। वह कर्नाटक में तैनात थीं।

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IAS of the 70s turns out to be Premlal Pilibhit connection being sought Dehradun Uttarakhand news
मीटिंग ( प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्व विभाग ने सुश्री प्रेमलाल के जेंडर की गुत्था सुलझा ली है। वह 70 के दशक की आईएएस अधिकारी थीं। देहरादून के जमींदार राजा चंद्र बहादुर सिंह से उनके खून के रिश्ते थे। राजस्व अभिलेखागार से 60 बीघा जमीन के दस्तावेज गायब होने के मामले में अब उनका पीलीभीत कनेक्शन तलाशा जा रहा है।

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यह मामला जमींदारी उन्मूलन एक्ट लागू होने से जुड़ा है। देहरादून के जमींदार राजा चंद्र बहादुर सिंह के पास बेहिसाब जमीन थी। जमींदारी एक्ट लागू हुआ तो अतिरिक्त जमीनों पर सरकार ने कब्जा लेना शुरू कर दिया। ऐसे में चंद्र बहादुर ने वर्ष 1972 में अपनी अतिरिक्त जमीन में से 60 बीघा का एक टुकड़ा मौसेरी बहन आईएएस अफसर सुश्री प्रेमलाल को दान में दे दी। वह कर्नाटक में तैनात थीं।

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यह जमीन कई साल तक उनके नाम रही। नौकरी पूरी करने के बाद प्रेमलाल दिल्ली में निजामुद्दीन ईस्ट स्थित अपने मकान में आ गईं। अब करीब 50 साल बाद अचानक पीलीभीत के मक्खन सिंह एक पावर ऑफ अटॉर्नी लेकर प्रशासन के सामने उपस्थित हुए। दावा किया, प्रेमलाल ने वर्ष 1984 में 60 बीघा जमीन उनके पिता कश्मीर सिंह के नाम पावर ऑफ अटार्नी कर दी थी। बाद में कश्मीर सिंह ने अपने बेटे के नाम इसकी पावर ऑफ अटॉर्नी कर दी। इसलिए जमीन पर उन्हें कब्जा दिलाया जाए।

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चंद्र बहादुर की कई गांवों में थी जमीन

बताया जाता है कि देहरादून के आसपास कई गांवों में चंद्र बहादुर की जमींदारी थी। उनके पिता कर्नल शमशेर बहादुर दून की बड़ी हस्ती थे। धर्मपुर, रायपुर, लाडपुर, नत्थनपुर, रैनापुर, बक्सरवाला, डोईवाला समेत सैकड़ों गांवों में उनकी बेशकीमती जमीनें थीं। सीलिंग के दौरान जब अतिरिक्त जमीनों पर सरकार का कब्जा होने लगा तो जमींदार अपने रिश्तेदारों को जमीनें दान करने लगे।

दून की दिलकुशा कोठी में रहती थीं प्रेमलालएडवोकेट विकेश बताते हैं, अब तक की जानकारी जुटाने पर सामने आया है कि प्रेमलाल दिलकुशा कोठी में रहती थीं। बाद में आईएएस बनने पर वह दिल्ली चली गई थीं। उनके भाई मदन मोहन और मनमोहन भी देहरादून आते-जाते रहे हैं।

स्टांप चोरी से जोड़े जा रहे तार

बताया जा रहा है कि वर्ष 1984 में देहरादून में फर्जी स्टांप बेचने का मामला आया था। इस मामले को भी उसी प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं स्टांप चोरी का लाभ उठाकर कोई गलत पावर ऑफ अटॉर्नी दिखाकर इस जमीन को अपने नाम तो नहीं कराना चाहता।

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जिला प्रशासन हर बिंदु पर जांच कर रहा है। दावा करने वालों की पावर ऑफ अटॉर्नी में कितना दम है। दिल्ली की रहने वालीं प्रेमलाल ने पीलीभीत के किसी युवक को पावर ऑफ अटॉर्नी क्यों की। राजस्व अभिलेखागार से फाइल गायब होने के पीछे कहीं कोई साजिश तो नहीं। इन तमाम बिंदुओं पर जांच जारी है, जल्द कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. एसके बरनवाल, एडीएम प्रशासन, देहरादून

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