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पहाड़ से हो रही है महिलाओं की तस्करी
अमर उजाला, कोटद्वार
Updated Tue, 03 Dec 2013 06:58 PM IST
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जिन क्षेत्रों में सामान्य अपराध भी चर्चा का विषय बन जाते थे अब वहां पर मानव तस्करी जैसे मामले सामने आने लगे हैं।
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उत्तराखंड के कोटद्वार में एक साल पहले गठित किए गए एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल में अब तक ऐसे सात मामले मानव तस्करी से जुड़े आ चुके हैं।
चार जिले शामिल
यहां पर जनवरी 2012 में पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल गठित हुई। जिसमें मानव व्यापार को रोकने के लिए पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया।
कोटद्वार थाने में गठित इस यूनिट के अंतर्गत चार जिले शामिल किए गए हैं। जिसमें पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग और टिहरी शामिल हैं। इन सभी जगह में मानव तस्करी के मामलों की जांच यहीं से की जाती है।
जांच को वापस भेज दिया
यूनिट के गठित होने के दस महीने में यहां पर सात मामले मानव व्यापार के आ चुके हैं। जिसमें सभी महिलाओं से जुड़े रहे हैं।
कुछ मामलों में महिलाओं की बरामदगी की गई, जबकि कुछ में जांच को वापस भेज दिया गया। इसमें अब तक टिहरी जिले से कोई भी मानव तस्करी का मामला सामने नहीं आया है।
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यह मामले आते हैं ह्यूमन ट्रैफिकिंग से
इसमें महिला को बेचना या शाररिक शोषण के लिए किसी को देना। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे को काम करवाने के लिए किसी को बेचना या या मानव अंगों का प्रत्यारोपण के लिए क्रय करना।
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40 वर्ष से कम आयु की विवाहित महिला के गुम होने के तीन महीने बाद वह मानव तस्करी में दर्ज हो जाता है।
जांच के साथ जागरुक करना भी है मकसद
यूनिट का काम मानव तस्करी रोकने के लिए जांच तो करना ही है साथ ही लोगों को इसके प्रति जागरुक करना भी है। मानव तस्करी में फंसी महिला या पुरुष की काउंसलिंग कर उसे सही मार्गदर्शन भी दिया जाता है।
ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट गठित करने का मकसद ही इसे मामलों की जांच अलग से करने और जागरुकता लाने के लिए की गई है। इसमें आम लोगों की भागीदारी जरूरी है। समाज में जागरुकता से ही इस तरह के मामलों को रोका जा सकता है।
-अरुणा भारती, सीओ