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घर की लागत है 10 लाख तो अब भरो टैक्स

Tue, 12 Aug 2014 12:45 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 12 Aug 2014 12:45 PM IST
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house owner pay tax after nine years in dehradun

10 लाख और इससे अधिक कीमत के भवनों के निर्माण पर कर्मकारों के कल्याण के बाबत लिए जाने वाले कर की वसूली प्राइवेट भवन स्वामियों और बिल्डरों से 9 साल बाद शुरू हो पाएगी।

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श्रम विभाग के अफसर करेंगे वसूली
कर निर्धारण और वसूली एसडीएम और तहसीलदार के बजाए अब श्रम विभाग के अफसर करेंगे। श्रम विभाग ने इस संबंध में एक हफ्ते में 10 नोटिस जारी कर दिए हैं।

केंद्र सरकार ने भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण कर नियमावली 1998 में बनाकर यह व्यवस्था की थी कि 10 लाख या इससे अधिक कीमत से बनने वालों भवनों की लागत की एक फीसदी धनराशि कर के रूप में कर्मकारों के कल्याण के लिए ली जाए।
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इस शासनादेश पर प्रदेश सरकार ने 2005 में उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण निधि बना दी।

कल्याण निधि में अभी तक किसी प्राइवेट भवन स्वामी और इसे बनाने वाले बिल्डर से कर की वसूली हुई ही नहीं, सिर्फ सरकारी भवनों के निर्माण पर यह धनराशि कल्याण निधि में दी जा रही थी।
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इसी महीने सचिव श्रम ने अफसरों की बैठक करके निजी भवनों से कर वसूली के आदेश जारी किए। इस पर 10 बिल्डरों को नोटिस जारी किया गया है।

कुछ भवन स्वामियों को नोटिस जारी किया गया। भवनों का कर निर्धारण किया जा रहा है। इसके बाद वसूली की जाएगी। नियमावली वर्ष 2005 में ही बन गई थी। सरकारी भवनों से ही कर मिल रहा था।

- एनसी कुलाश्री, सहायक श्रमायुक्त

नियमावली में जो भी व्यवस्था दी गई है, उसी के लिहाज से कर निर्धारण और कर वसूली होगी। इसकी व्यवस्था तैयार की जाएगी।
- चंद्रेश कुमार यादव, जिलाधिकारी

ऐसे पता लगाएंगे कीमत

भवन में लगे बिल्डिंग मेटेरियल के बाजार के रेट के हिसाब से भवन निर्माण की कुल लागत निकाली जाएगी। इसमें भूखंड की कीमत को शामिल नहीं किया जाएगा। कुल लागत का एक फीसदी कर के रूप में लिया जाएगा।

नियमावली में है यह व्यवस्था

- कर निर्धारण की जिम्मेदारी एसडीएम और कर वसूली की जिम्मेदारी तहसीलदार की थी। अपीलीय अधिकारी जिलाधिकारी हैं।
- भवन स्वामी या बिल्डर के खुद कुल लागत न बताने और कर न देने पर एसडीएम को अधिकार है कि वह कुल लागत का दो फीसदी कर के रूप में वसूल कर सकते हैं।

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