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पहले पति गया अब छिन गया जीने का सहारा
मुकेश नैथानी/अमर उजाला, घनसाली (टिहरी)
Updated Thu, 31 Jul 2014 08:37 PM IST
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जीवन साथी की मौत से उबरने के बाद शकुंतला ने दो छोटे बच्चों और वृद्ध सास-ससुर के लालन-पोषण के लिए कमर बांधी। पति की दुकान को दोबारा खोलकर परिवार की जिम्मदारी उठानी शुरू की।
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कुछ महीने भी नहीं हुए कि बादल फटने से आये मलबे ने उनके सामने फिर दुखों का पहाड़ खड़ा कर दिया। ऐसे में आगे जिंदगी की गुजर-बसर कैसे शुरू हो, इसे सोचकर ही वह सिहर उठती है।
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पति ने कर ली थी आत्महत्या
घनसाली में नौताड़ गांव निवासी शकुंतला देवी के हंसते-खेलते परिवार पर न जाने किसकी नजर लगी। उसके पति भाजपा नेता पूर्व प्रधान महादेव नौटियाल ने चार अप्रैल को खुदकुशी कर जीवनलीला समाप्त कर ली थी। घर में दो छोटे बच्चे और बूढ़े सास-ससुर के लालन-पालन की जिम्मेदारी के अहसास ने शकुंतला को हिम्मत दी।
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उसने अपने दुख को किनारे रखते हुए नए सिरे से गृहस्थी की गाड़ी चलानी शुरू की। पति की दुकान दोबारा खोली। उसके परिवार का जीवन पटरी पर लौट रहा था कि बुधवार रात आए जलजले से दुकान मलबे में मटियामेट हो गई।
अब उसके पास कोई साधन नहीं रहा। कैसे परिवार की गाड़ी को आगे बढ़ाएंगी, उसे कुछ सूझता नहीं दिख रहा है। कहती है ‘ये भगवान त्वैन यो क्या करे, अब क्या-क्या परीक्षा ले लू। कनै पाललू मैं अपणा बच्चों और सास-ससुर तैं।’
घर से निकलना जान पर पड़ा भारी
बादल फटने की आवाज पर शकुंतला की सास मगनी देवी घर से बाहर निकली। इतने में पहाड़ी का मलबा उसके ऊपर आ गिरा और उनकी मौत हो गई। इस दौरान मलबे से घर का दरवाजा भी बंद हो गया।
बाद में गांव के लोगों ने घर के अंदर से फंसी शकुंतला देवी, उसके बच्चे और ससुर को बमुश्किल बाहर निकाला। इस हादसे के बाद शकुंतला देवी पूरी तरह से टूट चुकी है।