प्रदेश के अस्पतालों को खुद ‘इलाज’ की दरकार
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पोखरी ब्लॉक मुख्यालय पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीणों को स्वास्थ्य लाभ देने में नाकाम साबित हो रहा है। केंद्र में सृजित दस पदों के सापेक्ष एक भी डाक्टर तैनात नहीं है। ग्रामीण मरीजों को रुद्रप्रयाग या श्रीनगर ले जाने के लिए मजबूर हैं।
सितंबर माह में अस्पताल में तैनात डा. मदन बोनाल के तबादले के बाद से अस्पताल में डाक्टर नहीं हैं। केंद्र में एक संविदा डाक्टर की तैनाती की, लेकिन वह डाक्टर भी अवकाश पर है। अस्पताल इन दिनों एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। दूर-दराज के गांवों से मरीज स्वास्थ्य केंद्र में पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा है।
स्थिति यह है कि मामूली बीमारी के उपचार के लिए भी लोगों को हायर सेंटर जाना पड़ रहाहै। पोखरी ब्लॉक के रौता गांव निवासी युद्धवीर सिंह के साथ भी ऐसा ही हुआ। शरीर में दर्द होने के कारण वह बृहस्पतिवार को उपचार के लिए सीएचसी पोखरी पहुंचे। यहां डाक्टर और तकनीकी सहायक के न होने से बाद में उन्हें सीएचसी कर्णप्रयाग ले जाया गया, जहां उनका उपचार हुआ।
ऐसा ही पोखरी ब्लॉक के आली गांव निवासी भजन सिंह के साथ भी हुआ। पेट में दर्द होने पर उन्हें परिजन सीएचसी पोखरी लाए। पूरा दिन काटने के बाद भी भजन सिंह का इलाज नहीं हो पाया। बाद में दर्द बढ़ते देख परिजन उन्हें जिला चिकित्सालय ले गए। तब जाकर उनका इलाज हो पाया।
धूल फांक रही हैं मशीनें
सीएचसी में एक्सरे और अन्य जरूरी उपकरण तो हैं, लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए तननीकी कर्मचारी नहीं हैं। ग्रामीणों को एक्सरे कराने के लिए भी 50 किमी दूर कर्णप्रयाग जाना पड़ रहा है।
कभी भी कट सकता है कनेक्शन
सीएचसी पोखरी का विद्युत कनेक्शन कभी भी कट सकता है। वर्ष 2006 से अस्पताल का विद्युत बिल 5 लाख 68 हजार रुपये का भुगतान नहीं हो पाया है। ऊर्जा निगम ने केंद्र को कई बार नोटिस दिया जा चुका है।