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सम्मान ही साहित्यकारों की असली धरोहर : डॉ. फारूख
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देहरादून। हिन्दी दिवस के अवसर पर रविवार को हिन्दी साहित्य समिति देहरादून की ओर से सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। हिंदी भवन में आयोजित समारोह में पांच साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर डॉ. मुकुंद नीलकंठ जोशी की पुस्तक हिंदी नीतिशतक का लोक ार्पण भी किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि समाजसेवी डॉ. एस. फारूख ने कहा कि समिति की ओर से साहित्यकारों सम्मान प्रशंसनीय कदम है। इससे साहित्यकारों का उत्साह बढ़ता है। वास्तव में साहित्यकारों का सम्मान ही असली धरोहर है। पुस्तक नीतिशतक के बारे में उन्होंने कहा कि डॉ. मुकुंद ने भर्तृहरि द्वारा लिखित संस्कृत नीतिशतकम् का हिंदी में अनुवाद कर विलक्षण कार्य किया है। इससे आम लोगों तक नीतिशतक का ज्ञान पहुंच पाएगा। डॉ मुकुं द ने कहा कि इसकी प्रेरणा उन्हें डॉ. रामविनय सिंह व प्रमोद भारती से मिली। इस दौरान समिति के अध्यक्ष रामविनय, महांमत्री हेमवती नंदन कुकरेती, डॉ. प्रमोद भारतीय, इंद्रदेव रतूड़ी, जगदीश वावला, डौली डबराल, संगीता शाह, वीना बेंजवाल, रमाकांत बेंजवाल, नीता कुकरेती, कमला पंत, सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार मौजूद थे।
ये साहित्यकार हुए सम्मानित
हिंदी साहित्य सेवा के लिए वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व कुलपति डॉ. सुधारानी पांडे, हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता के लिए सोमवारी लाल उनियाल, संस्कृत साहित्य में उल्लेखनीय कार्य के लिए कालिदास सम्मान प्राप्त डॉ. निरंजन मिश्र, लोक भाषा गढ़वाली के वरिष्ठ साहित्यकार एवं धाद के संपादक गणेश खुगशाल गणी व हिंदी काव्य के लिए इंदुभूषण कोचगर्व को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
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समारोह के मुख्य अतिथि समाजसेवी डॉ. एस. फारूख ने कहा कि समिति की ओर से साहित्यकारों सम्मान प्रशंसनीय कदम है। इससे साहित्यकारों का उत्साह बढ़ता है। वास्तव में साहित्यकारों का सम्मान ही असली धरोहर है। पुस्तक नीतिशतक के बारे में उन्होंने कहा कि डॉ. मुकुंद ने भर्तृहरि द्वारा लिखित संस्कृत नीतिशतकम् का हिंदी में अनुवाद कर विलक्षण कार्य किया है। इससे आम लोगों तक नीतिशतक का ज्ञान पहुंच पाएगा। डॉ मुकुं द ने कहा कि इसकी प्रेरणा उन्हें डॉ. रामविनय सिंह व प्रमोद भारती से मिली। इस दौरान समिति के अध्यक्ष रामविनय, महांमत्री हेमवती नंदन कुकरेती, डॉ. प्रमोद भारतीय, इंद्रदेव रतूड़ी, जगदीश वावला, डौली डबराल, संगीता शाह, वीना बेंजवाल, रमाकांत बेंजवाल, नीता कुकरेती, कमला पंत, सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार मौजूद थे।
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ये साहित्यकार हुए सम्मानित
हिंदी साहित्य सेवा के लिए वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व कुलपति डॉ. सुधारानी पांडे, हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता के लिए सोमवारी लाल उनियाल, संस्कृत साहित्य में उल्लेखनीय कार्य के लिए कालिदास सम्मान प्राप्त डॉ. निरंजन मिश्र, लोक भाषा गढ़वाली के वरिष्ठ साहित्यकार एवं धाद के संपादक गणेश खुगशाल गणी व हिंदी काव्य के लिए इंदुभूषण कोचगर्व को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
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